ऑपरेशन सिंदूर की कारगिल जैसी समीक्षा की मांग, पूर्व CDS के बयान पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा
नई दिल्ली: भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के हालिया बयानों को आधार बनाकर केंद्र सरकार से ऑपरेशन सिंदूर की व्यापक और औपचारिक समीक्षा कराने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसकी तुलना 1999 के कारगिल युद्ध के बाद हुई समीक्षा प्रक्रिया से की है।
पूर्व CDS के बयान के बाद क्यों गरमाया मामला?
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के अलग-अलग मंचों पर दिए गए बयानों के बाद राजनीतिक चर्चा बढ़ी है। कांग्रेस का कहना है कि सैन्य अभियान से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों का जवाब अलग-अलग इंटरव्यू या बयानों के बजाय एक व्यवस्थित समीक्षा के जरिए सामने आना चाहिए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर की भी उसी तरह व्यापक समीक्षा होनी चाहिए, जिस तरह कारगिल युद्ध के बाद कारगिल रिव्यू कमेटी बनाई गई थी।
कांग्रेस ने क्या मांग रखी?
कांग्रेस की मांग है कि ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य और रणनीतिक समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र एवं व्यापक व्यवस्था बनाई जाए। पार्टी चाहती है कि समीक्षा में अभियान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन हो और इसके निष्कर्ष सार्वजनिक संस्थागत प्रक्रिया के तहत सामने आएं।
जयराम रमेश ने इस पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे बयानों को पर्याप्त नहीं बताते हुए औपचारिक समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया है।
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कारगिल समीक्षा समिति क्यों बनी थी?
1999 के कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कारगिल रिव्यू कमेटी गठित की थी। इसका उद्देश्य युद्ध के दौरान सामने आई कमियों और भविष्य के लिए जरूरी सुधारों का आकलन करना था। कमेटी की अध्यक्षता रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम ने की थी। बाद में इसकी रिपोर्ट संसद में रखी गई थी, आवश्यक हिस्सों को हटाने के बाद। यही उदाहरण कांग्रेस अब ऑपरेशन सिंदूर के मामले में सामने रख रही है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या कहा था पूर्व CDS ने?
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य विमानों को हुए नुकसान और अभियान में सामने आई कुछ सामरिक चुनौतियों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि महत्वपूर्ण बात केवल नुकसान की संख्या नहीं, बल्कि यह समझना है कि नुकसान क्यों हुआ और उससे क्या सीख ली गई।
इसी तरह के बयानों को लेकर कांग्रेस ने सरकार से व्यापक समीक्षा की मांग को फिर प्रमुखता दी है।
सरकार ने कांग्रेस की मांग मान ली है?
26 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में कांग्रेस की ओर से समीक्षा की मांग की पुष्टि होती है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा कारगिल जैसी नई समीक्षा समिति गठित करने की घोषणा की पुष्टि नहीं मिली है।
“कांग्रेस ने समीक्षा की मांग की”, न कि “सरकार ने समीक्षा शुरू कर दी।”
ऑपरेशन सिंदूर क्यों महत्वपूर्ण है?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसका महत्व काफी बड़ा है। इसी कारण इससे जुड़े सैन्य आकलन और रणनीतिक फैसले राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय भी बनते रहे हैं। हालांकि सैन्य अभियानों के मामले में ऑपरेशनल जानकारी और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को सार्वजनिक करने की सीमाएं भी होती हैं। इसलिए किसी भी समीक्षा की जानकारी सामने आने पर आधिकारिक दस्तावेज और प्रमाणित बयानों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
कांग्रेस के बयान का राष्ट्रीय असर क्या है?
कांग्रेस की मांग ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सैन्य जवाबदेही, रणनीतिक समीक्षा और संसद के प्रति संस्थागत जवाबदेही की बहस को फिर सामने ला दिया है। विपक्ष का तर्क है कि बड़े सैन्य अभियानों के बाद केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संस्थागत स्तर पर समीक्षा से भविष्य की तैयारियों को बेहतर किया जा सकता है। दूसरी ओर, ऑपरेशन से जुड़े संवेदनशील सैन्य विवरणों को सार्वजनिक करने को लेकर सुरक्षा संबंधी पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।
1999 के कारगिल और ऑपरेशन सिंदूर में क्या अंतर है?
दोनों अभियानों की परिस्थितियां अलग थीं। कारगिल युद्ध मुख्य रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में जमीनी सैन्य संघर्ष से जुड़ा था, जबकि ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक तकनीक, सटीक हमलों और बहु-आयामी सैन्य क्षमता के संदर्भ में अलग प्रकृति का अभियान था। इसलिए कांग्रेस द्वारा “कारगिल जैसी समीक्षा” की मांग का मतलब यह नहीं है कि दोनों सैन्य अभियानों को समान माना जा रहा है। इसका मुख्य आशय एक औपचारिक और व्यापक समीक्षा प्रक्रिया से है।
आगे क्या होगा?
अब नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यदि सरकार इस मांग पर कोई औपचारिक फैसला लेती है या ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित समीक्षा प्रक्रिया की घोषणा करती है, तो मामले का अगला चरण स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस ने पूर्व CDS के बयानों के बाद ऑपरेशन सिंदूर की कारगिल जैसी व्यापक समीक्षा की मांग उठाई है।
ऑपरेशन सिंदूर पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के बयानों के बाद कांग्रेस ने केंद्र से कारगिल रिव्यू कमेटी की तर्ज पर ऑपरेशन सिंदूर की व्यापक समीक्षा कराने की मांग की है। हालांकि ! मामले में आगे केंद्र की प्रतिक्रिया और किसी आधिकारिक समीक्षा के गठन पर नजर रहेगी।
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