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ज्ञानेश कुमार से जवाब मांग रहा विपक्ष, भाजपा ने क्यों खोल दिया मोर्चा?

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Published on Nov 05, 2026 • 40 views
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वोट चोरी पर विपक्ष के सवाल, भाजपा का पलटवार! जब निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, तो जवाब देने क्यों उतरी BJP?

Inflowire News Desk | india News

देश में इन दिनों चुनावी वोटर लिस्ट और कथित वोट चोरी का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक तरफ कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के तमाम दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेर रहे हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

लेकिन इसी बीच भाजपा ने भी विपक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति बनाई है।

अब सवाल यह है कि जब विवाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर है, तो भाजपा सीधे विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रही है? क्या यह सिर्फ राजनीतिक जवाबी कार्रवाई है या इसके पीछे कोई बड़ी चुनावी रणनीति भी है?

>> ऐसे में आखिर विपक्ष ज्ञानेश कुमार से क्या चाहता है?

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि इससे मताधिकार प्रभावित हो सकता है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का अभ्यास बताया गया है। डुप्लीकेट और अपात्र नामों को हटाना इसका घोषित उद्देश्य है।

>> भाजपा विपक्ष के खिलाफ क्यों उतरी?

इसका जवाब भाजपा की राजनीतिक रणनीति में छिपा है।

भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच भ्रम फैला रहा है। इसी आरोप के जवाब में पार्टी ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए भाजपा विपक्ष के आरोपों को चुनौती देना चाहती है। पार्टी की योजना जनसभाओं, पदयात्राओं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाने की है।

यानी विपक्ष जहां SIR और चुनाव आयोग की जवाबदेही को मुद्दा बना रहा है, वहीं भाजपा इस पूरे विवाद को विपक्ष की राजनीतिक मुहिम के तौर पर पेश कर रही है।

>> जब सवाल चुनाव आयोग से है, तो जवाब भाजपा क्यों दे रही है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

दरअसल, यहां दो अलग-अलग स्तर पर लड़ाई चल रही है।

पहला स्तर संवैधानिक है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, SIR की प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए।

दूसरा स्तर राजनीतिक है। विपक्ष इन आरोपों के जरिए केंद्र की भाजपा सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर रहा है। उसका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया का फायदा सत्तारूढ़ दल को मिल रहा है।

ऐसे में भाजपा इसे केवल चुनाव आयोग का मामला मानकर छोड़ने के बजाय राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष को जवाब दे रही है।

लोकतंत्र में सरकार हो या विपक्ष, किसी भी पक्ष के दावों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। अगर मतदाता सूची में किसी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसकी शिकायत और सुधार की पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।

और अगर विपक्ष के आरोप गलत हैं, तो चुनाव आयोग को आंकड़ों और दस्तावेजों के जरिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

क्योंकि लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण किसी राजनीतिक दल की जीत या हार नहीं, बल्कि हर योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार है।

इस पूरे विवाद में विपक्ष चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है और भाजपा विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठा रही है।

लेकिन जनता का सवाल दोनों से है—वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है या नहीं? अगर नहीं है तो आंकड़े सामने रखिए और अगर है तो जिम्मेदारी तय कीजिए।

क्योंकि चुनाव किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से चलने वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था है।

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Tags: Vote Chori Gyanesh Kumar BJP Congress Rahul Gandhi SIR Election Commission INDIA Alliance

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