दिल्ली में पुलिस के सामने पुलिस! वकीलों की नाराजगी से गरमाया माहौल, आखिर क्यों आमने-सामने आए खाकी वर्दी वाले?
2 November 2026 | Delhi | Inflowire
दिल्ली में पुलिस बनाम पुलिस! वकीलों से नाराजगी के बाद पुलिस मुख्यालय में ही शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
आपने पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए तो कई बार देखा होगा, लेकिन दिल्ली में सोमवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां पुलिस के सामने पुलिस ही खड़ी हो गई।
वर्दी एक, विभाग एक और मुख्यालय भी एक... लेकिन सवाल अलग-अलग! आखिर दिल्ली पुलिस के जवान अपने ही अधिकारियों के खिलाफ सड़कों पर क्यों उतर आए?
राजधानी दिल्ली में सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर उस वक्त असामान्य स्थिति बन गई, जब पुलिसकर्मियों ने अपने ही विभाग के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस प्रदर्शन की वजह दो पुलिस अधिकारियों का तबादला बताया जा रहा है। मामला दिल्ली के शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है।
दरअसल 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में हुई झड़प के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने का आरोप सामने आया था। इसके बाद वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दिल्ली की जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी।
वकीलों के दबाव और विवाद के बीच ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया।
28 अक्टूबर को वकीलों की हड़ताल समाप्त हो गई, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर इस फैसले को लेकर नाराजगी बढ़ने लगी।
>> पुलिस मुख्यालय में क्या हुआ?
2 नवंबर को करीब 80 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारी अपने दोनों अधिकारियों के तबादले का विरोध कर रहे थे और उनकी पुरानी पोस्टिंग बहाल करने की मांग उठा रहे थे।
दिलचस्प बात यह रही कि प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को रोकने के लिए उनके ही विभाग के दूसरे पुलिसकर्मी तैनात थे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की और पुलिस कमिश्नर से बातचीत के लिए मुख्यालय के अंदर जाने को कहा।
मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस मुख्यालय के भीतर भी विरोध और नारेबाजी की खबरें सामने आईं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदर्शनकारी कर्मियों की शिकायतें सुनने के लिए बैठक करनी पड़ी।
<< सबसे बड़ा सवाल >>
यह विवाद अब केवल वकीलों और पुलिस के बीच का मामला नहीं रह गया है। पुलिसकर्मियों का सवाल है कि क्या वकीलों के विरोध के बाद उनके अधिकारियों पर एकतरफा कार्रवाई की गई?
वहीं, वकीलों ने अपने साथी के साथ हुई कथित मारपीट और धमकी के मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
इस बीच पुलिस और वकीलों के बीच भविष्य में विवाद रोकने के लिए संयुक्त समन्वय समिति बनाने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर भी सहमति बनी है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस के भीतर अनुशासन, आपसी एकजुटता और अधिकारियों के फैसलों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस मुख्यालय में उठी नाराजगी का समाधान बातचीत से निकलता है या यह विवाद आगे और बढ़ता है।