Sunday, November 08, 2026
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6 साल जेल में रहने के बाद शरजील इमाम को मिली अंतरिम जमानत, 10 अक्टूबर को फिर लौटना होगा

Inflowire

Published on Oct 05, 2026 • 59 views
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शरजील इमाम जेल से बाहर आए, लेकिन सिर्फ 7 दिन के लिए; क्या है इस अंतरिम जमानत की पूरी कहानी?

Inflowire Sunday Special | 4 अक्टूबर 2026

शरजील इमाम एक बार फिर जेल से बाहर हैं।

लेकिन यह स्थायी रिहाई नहीं है और न ही उन्हें 2020 के दिल्ली दंगा मामले में नियमित जमानत मिली है।

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने उन्हें 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी है। इसकी वजह उनके दो चचेरे भाइयों की शादी है। अदालत के आदेश के मुताबिक उन्हें 10 अक्टूबर की शाम जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करना होगा।

यानी करीब छह साल से जेल में बंद शरजील इमाम फिलहाल कुछ दिनों के लिए अपने परिवार के बीच हैं, लेकिन उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही खत्म नहीं हुई है।

यहीं से इस कहानी के कई बड़े सवाल निकलते हैं।

शरजील इमाम को नियमित जमानत क्यों नहीं मिली?

छह साल बाद भी मुकदमे की स्थिति क्या है?

अंतरिम जमानत किन शर्तों पर मिली है?

शरजील इमाम को अभी किस आधार पर बाहर आने की अनुमति मिली?

कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को उनके दो चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत दी है।

अदालत के सामने दोनों विवाहों की जानकारी और संबंधित कार्यक्रमों की पुष्टि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के जरिए हुई थी।

एक शादी दिल्ली में 4 अक्टूबर को और दूसरी बिहार के सासाराम में 7 अक्टूबर को निर्धारित है। अदालत ने इन पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अस्थायी राहत दी।

इसके लिए उन्हें 50 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि का एक जमानती देने की शर्त रखी गई।

उन्हें 10 अक्टूबर की शाम जेल प्रशासन के सामने वापस सरेंडर करना होगा।

“शरजील इमाम को सात दिन की अंतरिम जमानत मिली और वे जेल से बाहर आए।”

आखिर शरजील इमाम किस मामले में जेल में हैं?

शरजील इमाम पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित “larger conspiracy” मामले में मुकदमा चल रहा है।

इस मामले में उन पर Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA सहित कई धाराओं के तहत आरोप है।

शरजील इमाम को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद वे न्यायिक हिरासत में रहे हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है।

किसी आरोपी का जेल में होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। अंतिम दोषसिद्धि अदालत के फैसले से होती है।

नियमित जमानत क्यों नहीं मिली?

सिर्फ कुछ दिन पहले, 30 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश और न्यायिक अनुशासन को महत्वपूर्ण माना।

यानी 4 अक्टूबर को मिली राहत को 30 सितंबर के नियमित जमानत वाले फैसले से अलग समझना होगा।

30 सितंबर: नियमित जमानत नहीं मिली।

4 अक्टूबर: पारिवारिक शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत मिली।

दोनों आदेशों का कानूनी उद्देश्य अलग है।

क्या शरजील इमाम को 10 अक्टूबर के बाद फिर जेल जाना होगा?

मौजूदा अदालत के आदेश के अनुसार हां। उन्हें 10 अक्टूबर की शाम संबंधित जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करना है। अर्थात यह राहत एक निश्चित अवधि के लिए है। अगर आगे अदालत से कोई नया आदेश नहीं आता तो अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें फिर न्यायिक हिरासत में लौटना होगा।

क्या अंतरिम जमानत के दौरान उन पर कोई प्रतिबंध हैं?

रिपोर्ट किए गए अदालत के आदेश के अनुसार उन पर जमानत की शर्तें लागू हैं। इनमें गवाहों से संपर्क न करना और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से संबंधित प्रतिबंध भी शामिल हैं।

इसका मतलब है कि अदालत ने उन्हें सीमित अवधि के लिए बाहर रहने की अनुमति दी है, लेकिन मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है।

छह साल से जेल में रहने के बावजूद मामला खत्म क्यों नहीं हुआ?

यहीं से यह मामला कानूनी और संवैधानिक बहस का विषय बन जाता है।

शरजील इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में हैं और दिल्ली दंगा “larger conspiracy” मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।

UAPA जैसे कड़े कानून में जमानत के लिए कानूनी मानदंड सामान्य आपराधिक मामलों से अलग और अधिक कठिन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में शरजील इमाम और उमर खालिद को नियमित जमानत देने से इनकार किया था। इसके बाद सितंबर 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। यही वजह है कि शरजील इमाम की हिरासत को लेकर “ट्रायल में देरी बनाम गंभीर आरोप” की बहस लगातार बनी हुई है। अदालत द्वारा जमानत खारिज करना और किसी व्यक्ति को अपराध का दोषी ठहराना दो अलग-अलग बातें हैं।

शरजील इमाम के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और मामला अदालत में लंबित है।

लेकिन अंतिम दोषसिद्धि या बरी किए जाने का फैसला मुकदमे के बाद अदालत करेगी।

फिर 7 दिन की जमानत क्यों?

अदालत ने इस बार नियमित जमानत के गुण-दोष पर फैसला नहीं किया। यह एक सीमित पारिवारिक अवसर के लिए अंतरिम राहत है। अदालत के सामने यह तथ्य था कि उनके दो चचेरे भाइयों की शादी निर्धारित है और जांच अधिकारी ने विवाह से संबंधित जानकारी को सत्यापित किया था।
अदालत ने इस आधार पर सीमित अवधि की राहत दी।

एक दिलचस्प संयोग: 10 अक्टूबर को वापस जेल और उसी समय दिल्ली में आंदोलन

इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि शरजील इमाम की अंतरिम जमानत 10 अक्टूबर को खत्म हो रही है। और इसी समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR को लेकर बड़े प्रदर्शन का आह्वान भी किया गया है।

हालांकि दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ना भी ठीक नहीं होगा।

Inflowire Explainer: पूरी कहानी एक नजर में

शरजील इमाम की आज की रिहाई को समझने का सबसे सही तरीका यही है कि यह “जेल से स्थायी आजादी” नहीं, बल्कि सात दिन की न्यायिक राहत है।

करीब छह साल से चल रही कानूनी लड़ाई में नियमित जमानत का रास्ता अभी बंद है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज की थी, जबकि कड़कड़डूमा कोर्ट ने पारिवारिक शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी। मामला अदालत में है। आरोप गंभीर हैं। लेकिन अंतिम दोषसिद्धि अभी बाकी है।
 

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Tags: शरजील इमाम Sharjeel Imam अंतरिम जमानत Delhi Riots Case UAPA Delhi High Court Karkardooma Court 2020 Delhi Riots Sunday Special

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