Muzaffarpur News: स्कूल में गंगाजल से कुर्सी और ऑफिस का शुद्धिकरण, वीडियो वायरल; हेडमास्टर निलंबित, जानिए कब क्या हुआ
Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर के मुरौल प्रखंड स्थित राजकीयकृत शिवनंदन उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। वीडियो में प्रभारी प्रधानाध्यापक ज्ञान प्रकाश को गंगाजल और मंत्रोच्चार के साथ कार्यालय तथा कुर्सी का कथित शुद्धिकरण करते देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला?
मामला मुजफ्फरपुर के मुरौल प्रखंड स्थित राजकीयकृत शिवनंदन उच्च माध्यमिक विद्यालय का है। वायरल वीडियो में प्रभारी प्रधानाध्यापक ज्ञान प्रकाश अपने कार्यालय में गंगाजल का इस्तेमाल करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में कुर्सी और कार्यालय के आसपास गंगाजल छिड़कने तथा मंत्रोच्चार किए जाने का दृश्य सामने आया है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के दावे किए जाने लगे। इनमें कुछ लोगों ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़कर देखा। हालांकि, शुद्धिकरण के पीछे जाति या समुदाय विशेष को लेकर क्या मंशा थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
4 सितंबर को मामला शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया और इसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू हुई।
कब हुई कार्रवाई?
वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा। विभाग ने प्रथम दृष्टया उनके आचरण को गंभीर अनुशासनहीनता माना।
इसके बाद ज्ञान प्रकाश को निलंबित कर दिया गया और उनका वेतन रोकने का आदेश दिया गया। मामले को विभागीय कार्रवाई के अधीन भी रखा गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सकरा के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रधानाध्यापक का क्या कहना है?
मामले का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार ज्ञान प्रकाश ने जाति या धर्म आधारित किसी मंशा से इनकार किया है। उस्का कहना है कि वह नियमित रूप से प्रार्थना करते हैं और पदभार संभालने के बाद पूजा के दौरान गंगाजल का इस्तेमाल किया गया। उनके मुताबिक कुछ शिक्षकों ने मजाक में कार्यालय और कुर्सी को शुद्ध करने की बात कही और उसी दौरान वीडियो बनाया गया, जिसे बाद में अलग संदर्भ में प्रसारित किया गया।
हालांकि, मामला ऐसे समय सामने आया है जब 'शुद्धिकरण' की घटनाओं को लेकर जातीय भेदभाव और सामाजिक समानता पर देशभर में राजनीतिक बहस चल रही है।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
सरकारी स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं होता, बल्कि वहां सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। इसी वजह से शिक्षा विभाग ने मामले को केवल व्यक्तिगत आस्था का विषय न मानकर सरकारी सेवक के आचरण और स्कूल के शैक्षणिक वातावरण से जोड़कर देखा है।
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया, शुद्धिकरण क्यों किया गया और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।