मोतिहारी में रिंग बांध टूटने से 70 घरों में घुसा पानी, बगहा में तटबंध टूटा; NDRF संभाल रही मोर्चा
मोतिहारी/बगहा, 29 सितंबर 2026 | Inflowire
बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के कई इलाकों में बाढ़ का दबाव बढ़ गया है। मोतिहारी में रिंग बांध टूटने के बाद करीब 70 घरों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। वहीं पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके में चंपारण तटबंध का हिस्सा टूटने के बाद निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। राहत और बचाव के लिए NDRF समेत प्रशासनिक टीमें सक्रिय हैं।
मोतिहारी में रिंग बांध टूटने के बाद घरों में पानी
मोतिहारी जिले में गंडक के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के दबाव के बीच रिंग बांध टूटने की सूचना सामने आई है। इसके बाद आसपास के आबादी वाले इलाकों में पानी पहुंच गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 घरों के डूबने/प्रभावित होने की बात सामने आई है।
पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर और अरेराज के कई गांवों में भी गंडक के बाढ़ के पानी से स्थिति प्रभावित हुई है।
बगहा में चंपारण तटबंध टूटा
पश्चिमी चंपारण के बगहा-1 प्रखंड के खैरटवा गांव के पास चंपारण तटबंध में टूटान हुआ। जल संसाधन विभाग के अनुसार गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 90.90 मीटर से लगभग 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। इसके बाद तटबंध में करीब 10 मीटर का माइनर ब्रीच हुआ और पानी खेतों की ओर फैलने लगा।
वहीं स्थानीय रिपोर्टों में खैरटवा के पास तटबंध के लगभग 150 फीट हिस्से के टूटने की जानकारी दी गई है। टूटान के बाद आसपास के कई गांवों में पानी फैलने की आशंका बढ़ गई और लोगों में अफरातफरी की स्थिति बनी।
बगहा शहर के कई इलाकों में भी पानी
गंडक की बाढ़ का असर बगहा शहर तक पहुंचा है। रिपोर्टों के मुताबिक शहर के कई वार्डों में पानी घुसा है। बगहा-बेतिया और बगहा-वाल्मीकिनगर मार्ग पर भी पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
गंडक का जलस्तर क्यों बढ़ा?
इस बाढ़ की पृष्ठभूमि में नेपाल में भारी बारिश और गंडक नदी में बढ़ा जलप्रवाह प्रमुख कारणों में शामिल है। वाल्मीकिनगर बैराज से सोमवार को 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि बाद में डिस्चार्ज में कमी आने की बात प्रशासन की ओर से कही गई।
प्रशासन और NDRF की चुनौती
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बिहार में बाढ़ की आशंका वाले जिलों में NDRF की तैनाती और तैयारी पहले से की गई थी। NDRF की पटना स्थित 9वीं बटालियन भी बिहार के लिए प्रमुख तैनाती इकाइयों में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने 28 सितंबर को मोतिहारी और गोपालगंज का हवाई सर्वेक्षण कर अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
अभी सबसे बड़ा सवाल
बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों में पहुंचने के बाद सबसे बड़ी चिंता लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घरों में फंसे परिवारों की मदद और तटबंध की मरम्मत को लेकर है। जलस्तर में बदलाव के साथ स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए प्रशासन की निगरानी और स्थानीय लोगों को जारी निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।