कर्नाटक में BJP को झटका, पूर्व विधायक नरेंद्र बाबू कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
कर्नाटक | INFLOWIRE
कर्नाटक की राजनीति में रविवार को एक अहम राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। बेंगलुरु के पूर्व विधायक एन.एल. नरेंद्र बाबू ने कांग्रेस में वापसी कर ली। उनके कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
नरेंद्र बाबू को कांग्रेस का झंडा सौंपकर पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल कराया गया। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं के भी कांग्रेस से जुड़ने की जानकारी सामने आई है।
नरेंद्र बाबू का कांग्रेस में लौटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और बाद में BJP में चले गए थे। अब एक बार फिर उन्होंने कांग्रेस का रुख किया है।
शिवकुमार का बड़ा दावा- BJP के कई नेता संपर्क में
नरेंद्र बाबू की कांग्रेस में वापसी के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने BJP को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया।
शिवकुमार के मुताबिक BJP के कई नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं और इनमें केंद्र स्तर के नेता भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में आने के इच्छुक नेताओं से बातचीत चल रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिला स्तर के मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों को ऐसे नेताओं की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जो कांग्रेस की विचारधारा और नेतृत्व के साथ जुड़ना चाहते हैं।
हालांकि, शिवकुमार के बयान में किसी ऐसे नेता का नाम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है जिसे निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल होने वाला बताया जा सके।
इसलिए फिलहाल इसे कांग्रेस में नेताओं के संभावित आने का राजनीतिक दावा माना जा रहा है
नरेंद्र बाबू की राजनीतिक वापसी क्यों अहम?
नरेंद्र बाबू की राजनीति का कांग्रेस से पुराना संबंध रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने उनके राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें पहले भी संगठन में जगह दी थी।
अब लंबे राजनीतिक अंतराल के बाद उनकी कांग्रेस में वापसी हुई है। ऐसे में यह घटनाक्रम केवल एक नेता की पार्टी बदलने की खबर नहीं है, बल्कि बेंगलुरु की राजनीति में कांग्रेस के पुराने नेताओं और समर्थक आधार को फिर से जोड़ने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में नरेंद्र बाबू के समर्थकों की मौजूदगी भी इस वापसी को स्थानीय राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती है।
नरेंद्र बाबू ने BJP छोड़ने पर क्या संदेश दिया?
कांग्रेस में वापसी के दौरान नरेंद्र बाबू ने अपने पिछले राजनीतिक फैसलों पर भी बात की। उन्होंने अपने इस कदम को राजनीतिक रूप से नई शुरुआत के तौर पर पेश किया।
उनकी वापसी ऐसे समय हुई है जब कर्नाटक में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आने वाले चुनावों को लेकर संगठन मजबूत करने की कवायद शुरू हो चुकी है।
कांग्रेस के लिए ऐसे नेताओं की वापसी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे पार्टी को स्थानीय स्तर पर पुराने संगठनात्मक संपर्कों और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने का मौका मिल सकता है।
कांग्रेस ने BJP के नेताओं को दिया खुला संदेश
नरेंद्र बाबू की वापसी के मंच से कांग्रेस ने BJP छोड़कर आने वाले नेताओं के लिए भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है ।
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उन नेताओं से कांग्रेस में लौटने की अपील की गई जो पहले पार्टी छोड़कर BJP में गए थे। पार्टी का तर्क है कि राजनीतिक भविष्य केवल तत्काल पद या चुनावी टिकट पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
इससे संकेत मिलता है कि कर्नाटक कांग्रेस आने वाले समय में दलबदल कर चुके पुराने नेताओं की वापसी को भी अपनी संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा बना सकती है।
क्या BJP के और नेता कांग्रेस में जाएंगे?
यही इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है।
डी.के. शिवकुमार ने दावा किया है कि कई BJP नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि बातचीत में केंद्र स्तर के नेता भी शामिल हैं। लेकिन फिलहाल कांग्रेस में शामिल होने के लिए किसी अन्य BJP नेता की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
इसलिए अभी यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि BJP में बड़े पैमाने पर टूट होने जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच नेताओं का संपर्क और बातचीत चुनावी राजनीति में सामान्य प्रक्रिया है।
BJP के लिए क्या है चुनौती?
कर्नाटक में BJP पहले से ही कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान चला रही है। इसी बीच एक पूर्व BJP विधायक की कांग्रेस में वापसी और मुख्यमंत्री का यह दावा कि कई और नेता संपर्क में हैं, BJP के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
हालांकि BJP के सामने केवल दलबदल का मुद्दा नहीं है। संगठन को अपने नेताओं को एकजुट रखना, स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना और कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दों को चुनावी अभियान में बदलना भी बड़ी चुनौती होगी।
इसी बीच BJP ने 15 सितंबर से राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों को कवर करने वाली पांच दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की है। यह अभियान वंदे मातरम् विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ BJP की राजनीतिक लामबंदी का हिस्सा है।
कर्नाटक की राजनीति में आगे क्या?
नरेंद्र बाबू की कांग्रेस में वापसी को फिलहाल एक महत्वपूर्ण लेकिन स्थानीय स्तर के राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है। असली तस्वीर तब साफ होगी जब शिवकुमार के दावे के मुताबिक अन्य BJP नेता भी सार्वजनिक रूप से कांग्रेस में शामिल होते हैं।
कर्नाटक में पूर्व BJP विधायक एन.एल. नरेंद्र बाबू की कांग्रेस में वापसी ने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। उनके शामिल होने के तुरंत बाद डी.के. शिवकुमार का यह दावा कि कई BJP नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं, इस घटनाक्रम को और राजनीतिक महत्व देता है। लेकिन अभी तक सामने आए तथ्यों के आधार पर BJP में बड़े पैमाने पर टूट का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में यदि शिवकुमार के दावे के मुताबिक अन्य नेता कांग्रेस का दामन थामते हैं, तब इस घटनाक्रम का व्यापक राजनीतिक असर दिखाई दे सकता है।