ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद के बीच NDA के भीतर से भी SIR पर सवाल, कुमारस्वामी ने मांगा जवाब
New Delhi / Inflowire
नई दिल्ली | 26 सितंबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर सत्तारूढ़ NDA से जुड़े नेताओं की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) नेता एच.डी. कुमारस्वामी पहले ही कर्नाटक में SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के सामने आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा है।
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कर्नाटक SIR पर क्या है विवाद?
कुमारस्वामी ने जुलाई 2026 में कर्नाटक में चल रहे SIR को लेकर चुनाव आयोग से प्रक्रिया रोकने और दोबारा समीक्षा की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ क्षेत्रों में SIR के निर्धारित तौर-तरीकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
कुमारस्वामी के साथ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी समेत BJP और JD(S) नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर कर्नाटक में SIR को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिनिधिमंडल ने घर-घर सत्यापन, फॉर्म भरने की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
इन नेताओं ने अब तक जमा किए गए फॉर्मों के दोबारा सत्यापन और प्रक्रिया की निगरानी के लिए दूसरे राज्यों से पर्यवेक्षक नियुक्त करने जैसी मांगें भी रखी थीं।
ज्ञानेश कुमार पर विवाद क्यों बढ़ा?
विवाद की एक दूसरी कड़ी चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति दर्ज की। इनमें मतदाता सूची और SIR से जुड़े विषय भी शामिल बताए गए हैं।
चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि संस्थागत deliberation यानी विचार-विमर्श में अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है और पिछले एक साल में आयोग के फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
अब सवाल SIR की पारदर्शिता पर
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और SIR को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है, वहीं NDA के कुछ सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक LJP-R, RLM और TDP से जुड़े नेताओं ने भी आयोग से विवाद पर स्पष्टीकरण देने की बात कही।
ऐसे में मौजूदा विवाद का प्रमुख सवाल यही है कि SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे आरोपों पर चुनाव आयोग किस तरह तथ्य और प्रक्रिया के आधार पर स्पष्टीकरण देता है !
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