अभिजीत दीपके का विपक्ष पर हमला, बोले- चुनाव भी लड़ेंगे और विरोध भी करेंगे, दोनों साथ नहीं चल सकता
नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। दीपके ने सवाल उठाया कि अगर विपक्षी दलों को लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो वे उस चुनाव में हिस्सा क्यों लेते हैं।
दीपके ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। उनके मुताबिक, एक तरफ चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाना और दूसरी तरफ उसी व्यवस्था के तहत चुनाव लड़ना, दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं।
'अगर गड़बड़ी है तो चुनाव में हिस्सा क्यों?'
अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से कहा कि यदि उन्हें चुनावी प्रक्रिया में हेराफेरी या अनियमितता का भरोसा है, तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने यह तर्क भी रखा कि चुनाव में लगातार भागीदारी से वही व्यवस्था वैध दिखती है, जिस पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। दीपके ने विपक्षी दलों से राजनीतिक अस्तित्व से ऊपर लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकार को रखने की अपील की।
विपक्ष के सामने दीपके ने क्या सवाल रखा?
दीपके के बयान का मुख्य सवाल यह है कि यदि कोई राजनीतिक दल चुनाव को निष्पक्ष नहीं मानता, तो वह उसी चुनावी प्रक्रिया में भाग लेकर उसे चुनौती कैसे देता है।
उन्होंने विपक्षी दलों से स्पष्ट राजनीतिक रुख अपनाने की बात कही। उनके अनुसार, अगर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति है, तो केवल बयान और विरोध प्रदर्शन के बजाय चुनाव में भागीदारी को लेकर भी फैसला लेना चाहिए।
हालांकि, चुनावी प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर धांधली होने का दावा दीपके और अन्य राजनीतिक आलोचकों का आरोप है। इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विवाद
दीपके की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अभियान चला रही है। रिपोर्टों के अनुसार, CJP ने 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी।
वहीं चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में आयोग की ओर से यह कहा गया है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय और सवाल उठना प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है तथा SIR से जुड़े निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। इसलिए इस पूरे विवाद में अलग-अलग पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों के सामने चुनाव में भागीदारी को लेकर सीधा सवाल रखा है—अगर चुनावी व्यवस्था पर भरोसा नहीं है, तो उसी व्यवस्था में चुनाव क्यों लड़ना? उनका बयान मौजूदा चुनावी विवाद में एक राजनीतिक पक्ष की स्थिति को सामने रखता है। हालाकिं अभिजीत दीपके का विपक्षी दलों पर साधा गया सवाल महत्वपूर्ण है। चुकीं अगर विपक्ष को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हो रही है तो फिर आप चुनाव का हिस्सा कियूं बन रहे हैं। आपको किस बात की लालच है ये सार्वजनिक करना भी जरूरी है।