DMCH में लावारिस मरीज को फर्श पर घसीटने का वीडियो वायरल, क्या है पूरा मामला।
दरभंगा: दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) के इमरजेंसी विभाग से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में एक मरीज को सुरक्षा कर्मी द्वारा हाथ पकड़कर फर्श पर ले जाते हुए देखा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि मरीज को ट्रॉली के बजाय इसी तरह फर्श पर ले जाया गया।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था, खासकर लावारिस और बेसहारा मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ट्रॉली की मौजूदगी के बावजूद मरीज को फर्श पर ले जाने का वीडियो
घटना DMCH के इमरजेंसी विभाग की है। बताया जा रहा है कि मरीज को आर्थोपेडिक इमरजेंसी से ट्रायज एरिया की ओर ले जाने की जरूरत थी तभी इसी दौरान एक सुरक्षा कर्मी ने मरीज का हाथ पकड़कर उसे फर्श पर खींचते हुए आगे ले गया।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि इमरजेंसी परिसर में मरीजों को ले जाने के लिए ट्रॉलियां उपलब्ध थीं इसके बावजूद इस मरीज के लिए ट्रॉली का इस्तेमाल नहीं किया गया।
वीडियो सामने आने के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन से जवाब और जांच की मांग उठ रही है।
करीब तीन दिनों से इमरजेंसी में था मरीज
जानकारी के अनुसार, उक्त युवक को करीब तीन दिन पहले पुलिस द्वारा DMCH के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। युवक ने खुद को झंझारपुर का निवासी बताया है, लेकिन वह अपनी पहचान और परिवार से जुड़ी पूरी जानकारी बताने की स्थिति में नहीं है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में कई दिनों से मौजूद होने के बावजूद युवक का विधिवत दाखिला नहीं किया गया था। हालांकि, इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।
स्थानीय लोगों ने इलाज में मदद की
मरीज के इलाज को लेकर स्थानीय लोगों और वहां मौजूद कुछ मरीजों के परिजनों की ओर से मदद किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि कुछ लोगों ने पांच-पांच रुपये का पुर्जा कटाकर मरीज के इलाज में सहयोग किया।
अगर यह जानकारी सही है, तो इससे यह सवाल उठता है कि इतने समय से अस्पताल में मौजूद इस मरीज की नियमित चिकित्सा देखभाल और आवश्यक प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय थी।
लावारिस मरीजों की देखभाल पर सवाल
अस्पतालों में ऐसे मरीजों के लिए अलग व्यवस्था और जिम्मेदारी तय होना महत्वपूर्ण माना जाता है जो अपनी पहचान बताने या अपने परिजनों से संपर्क करने की स्थिति में नहीं होते हैं।
DMCH से सामने आए इस मामले ने यह सवाल खड़ा किया है कि लावारिस मरीजों को समय पर इलाज, सुरक्षित स्थानांतरण और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना किन परिस्थितियों में हुई और मरीज को ट्रॉली से क्यों नहीं ले जाया गया।
अस्पताल प्रशासन से जांच की उम्मीद
वीडियो सामने आने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जा सकता है कि उस समय मरीज की मेडिकल स्थिति क्या थी, उसे किस विभाग में ले जाया जा रहा था, ट्रॉली उपलब्ध थी या नहीं और सुरक्षा कर्मी को किसने आदेश दिया था कि वो मरीज को इस तरह ले जाने को मजबूर था।