दिल्ली मुस्लिम महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर तेजस्वी यादव का हमला, फेसबुक पोस्ट में केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली/पटना: दिल्ली में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और हिरासत का मामला अब बिहार की राजनीति तक पहुंच गया है। इस मुद्दे पर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट में पत्रकारों की पहचान और उनके पेशे को लेकर सवाल उठाते हुए लिखा, “ये मुसलमान है! महिला है! पत्रकार है! ये Gen-Z है।” इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि महिला पत्रकार का कथित अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होंने सरकार से सवाल पूछे।
दिल्ली में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों ने पुलिस पर मारपीट का लगाया आरोप, प्रेस संगठनों ने जांच की मांग की; पुलिस ने आरोपों को बताया गलत
क्या है पूरा मामला?
मामला दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके का है। दो स्वतंत्र मुस्लिम महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया है कि समाचार कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में साकेत थाने में उनके साथ मारपीट की गई। दोनों पत्रकार उस कार्यक्रम की कवरेज के लिए पहुंची थीं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी थी। पत्रकारों का आरोप है कि वे मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। प्रेस संगठनों ने भी मामले पर चिंता जताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने क्या कहा?
तेजस्वी यादव ने फेसबुक पोस्ट में इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने लिखा कि महिला पत्रकार ने सरकार से सवाल पूछा और इसी वजह से कथित तौर पर उनके साथ ज्यादती की गई। अपने पोस्ट में तेजस्वी ने इसे पत्रकारों के सवाल पूछने के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बीजेपी सरकार पर सत्ता के कथित दुरुपयोग और पत्रकारों को डराने का आरोप भी लगाया है।
दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस ने पत्रकारों को सवाल पूछने के कारण पीटे जाने के दावे को गलत और भ्रामक बताया है।
मामला अब राजनीतिक मुद्दा क्यों बन रहा है?
पत्रकारों की ओर से लगाए गए आरोप और पुलिस के खंडन के बाद मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सहित कई पत्रकार संगठनों ने कथित मारपीट पर चिंता जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट, उपलब्ध वीडियो/CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि घटनास्थल से लेकर थाने तक वास्तव में हुआ क्या था। मुस्लिम महिला पत्रकार के दावे और पुलिस के दावे में कितनी सच्चाई है। कौन सही है कौन गलत इसका फैसला भी जल्द हो जाएगा साक्ष्य के आधार पर।
INFLOWIRE की रिपोर्टिंग में दोनों पक्षों के दावों को सामने रखा जा रहा है। मुस्लिम महिला पत्रकारों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगी।