दरभंगा स्नातक MLC चुनाव: किसके सिर सजेगा ताज? BJP, RJD या जन सुराज—23 अक्टूबर पर सबकी नजर
Bihar News| 18 October 26 |Inflowire
◆ दरभंगा में सियासी पारा चढ़ा, 40 उम्मीदवार मैदान में—अब फैसला स्नातक मतदाताओं के हाथ!
दरभंगा। बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार कई राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए अहम मुकाबला बन गया है। भाजपा, राजद और जन सुराज की मौजूदगी ने चुनावी चर्चा को तेज कर दिया है। सवाल सिर्फ एक एमएलसी चुनने का नहीं, बल्कि यह भी है कि स्नातक मतदाता किन मुद्दों और किस तरह के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देते हैं।
भाजपा ने सर्वेश कुमार को मैदान में उतारा है। राजद की ओर से अनिल झा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि जन सुराज ने डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस के रजनीकांत पाठक और माले के संदीप चौधरी भी मुकाबले में हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अन्य प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दरभंगा स्नातक सीट पर कुल 40 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। ऐसे में चुनावी तस्वीर को केवल तीन दलों के बीच की लड़ाई मानना अधूरा होगा।
भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे सर्वेश कुमार के सामने सीट बचाने की चुनौती
भाजपा के सर्वेश कुमार इस चुनाव के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी और इस बार भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं।
उनकी उम्मीदवारी के साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि क्या पिछली जीत का आधार इस बार भी उनके पक्ष में काम करेगा। उन्होंने जीतकर क्या कुछ किया, उनके सामने विरोध भी है और दूसरी तरफ पार्टी का समर्थन, मतदाताओं से संपर्क और स्थानीय मुद्दों पर उम्मीदवार की पकड़ चुनावी चर्चा के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
राजद समर्थित अनिल झा के लिए कितना समर्थन?
राजद ने अनिल झा को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने चुनौती स्नातक मतदाताओं के बीच अपना समर्थन मजबूत करने की है।
चुनाव में रोजगार, शिक्षा, युवाओं की समस्याएं और स्नातक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर उम्मीदवारों की बात मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि अनिल झा ही जीत रहे हैं ऐसा कहना कहीं से भी उचित नही है।
अब बारी आती है जन सुराज की जिसने इस चुनाव को रोचक बना दिया है। मुस्लिम वोटर कहीं न कहीं तेजस्वी यादव के लिए गए उस फैसले से आहत भी है जहां 8 में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को जगह नही दिया जाना और जन सूरज से इम्तियाज नूरानी का आना एक संयोग भी है। हालांकि ये कहना भी उचित नही होगा कि 100% मुस्लिम वोटर इम्तियाज नूरानी के ही साथ हैं लेकिन कहीं न कहीं इम्तियाज नूरानी राजद के जीत में रोड़ा जरूर हैं।
जन सुराज की मौजूदगी से चुनाव में एक और राजनीतिक विकल्प सामने आया है। अब यह देखना होगा कि पार्टी का संगठन, उम्मीदवार का जनसंपर्क और उसका चुनावी अभियान स्नातक मतदाताओं तक कितना पहुंचता है।
लेकिन केवल नई पार्टी होने के आधार पर उसके प्रदर्शन को बेहतर या कमजोर बताना भी सही नहीं होगा।
दरभंगा स्नातक चुनाव में मतदाताओं के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल है_
◆ शिक्षित युवाओं के रोजगार और करियर के अवसर कैसे बढ़ेंगे?
◆ उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षणिक संस्थानों की समस्याओं पर कौन प्रभावी ढंग से आवाज उठाएगा?
◆ स्नातक मतदाताओं की शिकायतों को विधान परिषद तक पहुंचाने की क्या योजना है?
◆ उम्मीदवार का पिछला काम, उपलब्धता और स्थानीय संपर्क कितना मजबूत है?
◆ राजनीतिक दलों के वादों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में कितना अंतर है?
इन मुद्दों पर उम्मीदवारों के ठोस वादों और पिछले कार्यों की तुलना चुनाव को समझने में मदद कर सकती है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को नतीजे
निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
इस चुनाव में पंजीकृत स्नातक मतदाताओं की भागीदारी, मतदान का रुझान और उम्मीदवारों के बीच मतों का बंटवारा नतीजों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
किसके सिर सजेगा ताज?
भाजपा, राजद और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की चर्चा जरूर है, लेकिन 40 प्रत्याशियों की मौजूदगी में किसी एक उम्मीदवार को अभी से विजेता घोषित नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सर्वेश कुमार अपनी पिछली जीत को दोहरा पाएंगे, क्या अनिल झा राजद के लिए मजबूत प्रदर्शन कर पाएंगे, या जन सुराज के मोहम्मद इम्तियाज नूरानी अपनी मौजूदगी का प्रभाव दिखा पाएंगे?
इन सभी सवालों का जवाब अंततः मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
दरभंगा स्नातक MLC चुनाव 2026 का फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है। 27 अक्टूबर को आने वाला परिणाम ही बताएगा कि विधान परिषद में दरभंगा स्नातक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किसके हिस्से आता है।
Inflowire Note:
इस चुनाव में SIR, UGC का मुद्दा भी स्नातक वोटरों के सवालों के जद में है।पूर्व में हुए UGC का विरोध/समर्थन और वर्तमान में हो रहे SIR के खिलाफ देशभर में आंदोलन भी चुनाव पर प्रभाव डाल रहा है।