Crude Oil Price Today: हॉर्मुज संकट से तेल बाजार पर बढ़ा दबाव
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NEW DELHI : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। 17 अगस्त 2026 को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही धीमी रहने और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में किसी स्पष्ट प्रगति के संकेत नहीं मिलने से तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार के शुरुआती कारोबार में Brent Crude करीब $88.72 प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब $82.35 प्रति बैरल पर था। बाद में Brent करीब $89.40 तक भी पहुंचा।
हॉर्मुज में क्यों बढ़ी चिंता?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही में बड़ी गिरावट आने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार में चिंता बढ़ जाती है।
ताजा शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को हॉर्मुज से केवल 5 जहाज गुजरे, जबकि रविवार को कोई जहाज दर्ज नहीं हुआ। पिछले सप्ताहांत यह संख्या 31 थी। इस गिरावट ने बाजार में सप्लाई बाधित होने की आशंका को बढ़ाया है।
अमेरिका-ईरान बातचीत में क्या हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा हॉर्मुज के रास्ते को लेकर बातचीत पर बाजार की नजर बनी हुई है। लेकिन 17 अगस्त तक किसी बड़े समझौते की स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।
Reuters के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इससे बाजार में जल्द समाधान की उम्मीद कमजोर हुई है।
फिर भी तेल की कीमत में बड़ा उछाल क्यों नहीं?
हॉर्मुज में शिपिंग गतिविधि काफी कम होने के बावजूद तेल की कीमतों में अभी बहुत बड़ा उछाल नहीं आया है। बाजार केवल भू-राजनीतिक तनाव नहीं देख रहा, बल्कि यह भी आकलन कर रहा है कि वास्तविक तेल आपूर्ति कितनी प्रभावित हुई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में और बड़ी तेजी के लिए हॉर्मुज में नए हमलों, टैंकरों को वास्तविक नुकसान या तेल ढांचे को नुकसान जैसी ठोस घटनाओं के सामने आने की जरूरत हो सकती है।
पिछले सप्ताह भी तेल कीमतों में आया था उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव और टैंकरों पर हमलों की खबरों के बीच पिछले सप्ताह Brent और WTI दोनों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद सोमवार को भी बाजार में सप्लाई रिस्क को लेकर सतर्कता बनी रही।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत अपनी जरूरत के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय Crude Oil Price बढ़ने का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत और उसी अनुपात में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। घरेलू ईंधन कीमतों पर रुपये की विनिमय दर, तेल कंपनियों की खरीद लागत, टैक्स और अन्य बाजार कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
आगे किस बात पर रहेगी नजर?
आने वाले दिनों में तेल बाजार के लिए तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है या नहीं।
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होती है या नहीं।
- तेल टैंकरों और ऊर्जा ढांचे पर नए हमलों की स्थिति क्या रहती है।
अगर हॉर्मुज में आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ सकती है। इसके उलट, यदि बातचीत से तनाव कम होता है और शिपिंग सामान्य होती है तो तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। ऊपर दिए गए अंतरराष्ट्रीय भाव 17 अगस्त 2026 के उपलब्ध बाजार अपडेट पर आधारित हैं। घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग कारकों के आधार पर तय होती हैं।