Tarapur Transformers पर SEBI की सख्ती, ₹31.46 करोड़ के फंड से जुड़े मामले में बाजार से प्रतिबंध
नई दिल्ली: शेयर बाजार में सूचीबद्ध Tarapur Transformers Limited के मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सख्त कार्रवाई की है। नियामक के 31 अगस्त 2026 के आदेश में कंपनी और उससे जुड़े कई पक्षों पर securities market से प्रतिबंध लगाए गए हैं। मामला कंपनी के फंड के इस्तेमाल, संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
₹31.46 करोड़ के ब्याज-मुक्त ऋण और अग्रिम का मामला
SEBI की जांच के मुताबिक, अप्रैल 2018 से मार्च 2023 के बीच Tarapur Transformers से जुड़े पक्षों को करीब ₹31.46 करोड़ के interest-free loans और advances दिए गए थे।
नियामक के अनुसार इन रकम की वसूली नहीं की गई और कुछ मामलों में उन्हें write-off किया गया या उनके लिए provisions बनाए गए। SEBI ने इसे कंपनी के फंड के diversion से जुड़े गंभीर मामले के रूप में देखा।
₹14.37 करोड़ के trade receivables भी write-off
जांच में कंपनी के ₹14.37 करोड़ के trade receivables को write-off किए जाने की बात भी सामने आई।
SEBI के मुताबिक संबंधित entities के साथ कुछ ऐसे sales और purchase transactions पाए गए जिन्हें regulator ने fictitious transactions माना। नियामक का कहना है कि इन लेनदेन से कंपनी की revenue और net worth को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने तथा financial statements में गलत तस्वीर पेश करने का असर पड़ा।
प्रमोटर पर 5 साल का बाजार प्रतिबंध
SEBI ने Tarapur Transformers के प्रमोटर Rajendra Kumar Choudhary पर securities market में पांच साल का प्रतिबंध लगाया है। उनके ऊपर ₹30 लाख का monetary penalty भी लगाया गया है।
SEBI ने उन्हें इस मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बताया और कंपनी तथा shareholders के प्रति अपने दायित्वों का उल्लंघन करने की बात कही गई ।
कई अन्य entities पर भी कार्रवाई
SEBI के आदेश के तहत Tarapur Transformers से जुड़े कई अन्य entities पर भी securities market में प्रतिबंध लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार Choudhary Global Ltd, Veedhata Towers, Lorraine Finance, Rohit Steel Lamination, Deekay Iron and Steel, Kumudini Engineering और Ashadeep Multitrade पर तीन साल का market ban लगाया गया।
Ganesh Gangaram Madhari पर भी कार्रवाई की गई है और उनके खिलाफ ₹2 लाख का जुर्माना बताया गया है।
कंपनी पर अलग से जुर्माना क्यों नहीं?
SEBI ने Tarapur Transformers पर monetary penalty लगाने से परहेज किया। नियामक के अनुसार ऐसी monetary penalty का अंतिम भार कंपनी के shareholders पर पड़ सकता था।
SEBI ने अन्य संबंधित entities के मामले में भी monetary penalty नहीं लगाने का फैसला किया और उन्हें non-operational paper companies के रूप में वर्णित किया, जबकि market ban बरकरार रखा।
कंपनी और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
SEBI की कार्रवाई का मुख्य असर securities market में संबंधित entities और व्यक्तियों की भागीदारी पर पड़ेगा। यह मामला खास तौर पर corporate governance, related-party transactions, financial disclosures और investor protection के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, निवेशकों को केवल SEBI की कार्रवाई के आधार पर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला नहीं करना चाहिए। किसी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के आधिकारिक disclosures, financial results और stock-exchange filings को देखना जरूरी है।
Tarapur Transformers मामले में SEBI की कार्रवाई का केंद्र कंपनी के फंड के इस्तेमाल और कथित fictitious transactions से जुड़े गंभीर regulatory findings हैं। ₹31.46 करोड़ के loans और advances, ₹14.37 करोड़ के receivables write-off तथा financial disclosures से जुड़े मुद्दों की जांच के बाद नियामक ने कंपनी और उससे जुड़े पक्षों पर securities market restrictions लगाए हैं।