भारतीय शेयर बाजार गिरा: Sensex 555 अंक टूटा, Nifty 23,650 के नीचे; महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
INFLOWIRE DESK TEAM
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सप्ताह के कारोबारी सत्र में BSE Sensex 555.23 अंक यानी 0.73 फीसदी गिरकर 75,577.58 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 144 अंक यानी 0.61 फीसदी की गिरावट के साथ 23,635.10 पर बंद हुआ।
बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से जुड़ा रहा। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों में महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी।

क्यों गिरा भारतीय शेयर बाजार?
मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की घटनाओं पर रही। सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हूती हमलों के बाद Brent crude की कीमत करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमत में तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण चिंता मानी जाती है।
महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है। इसी वजह से निवेशकों के बीच बाजार को लेकर सतर्कता बढ़ी।
Sensex और Nifty का हाल
कारोबार समाप्त होने पर:
Sensex: 75,577.58 अंक
गिरावट: 555.23 अंक यानी 0.73%
Nifty 50: 23,635.10 अंक
गिरावट: 144.05 अंक यानी 0.61%
Reuters के अनुसार, दोनों प्रमुख सूचकांक पिछले सात कारोबारी सत्रों में लगभग 2.2 फीसदी नीचे आ चुके हैं।
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बैंकिंग और बड़ी कंपनियों पर भी दबाव
बाजार की गिरावट में वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों का भी योगदान रहा। Reuters के मुताबिक Nifty Financial Services इंडेक्स करीब 0.9 फीसदी और निजी बैंक इंडेक्स करीब 1 फीसदी नीचे रहे। ICICI Bank करीब 2 फीसदी और Reliance Industries लगभग 1.1 फीसदी गिरा।
हालांकि पूरे बाजार में एकतरफा गिरावट नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.2 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। डिफेंस शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।
रुपये पर भी दबाव
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव रहा। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 94.82 के स्तर पर बंद हुआ। महंगा कच्चा तेल रुपये के लिए भी चुनौती बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे भारत का आयात खर्च बढ़ने की आशंका रहती है।
आगे बाजार की दिशा किस पर निर्भर करेगी?
अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से तीन चीजों पर रहेगी—कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक ब्याज दरों का रुख। अगर तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो भारत में महंगाई, आयात लागत और रुपये पर दबाव की चिंता बढ़ सकती है। दूसरी तरफ तनाव कम होने और तेल की कीमतों में नरमी आने पर बाजार sentiment में सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल मंगलवार की गिरावट को देखते हुए बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। केवल एक कारोबारी सत्र की गिरावट के आधार पर आगे की दिशा तय करना उचित नहीं होगा।
निवेशकों के लिए जरूरी ?
शेयर बाजार में तेजी या गिरावट के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल किसी एक खबर के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।