CJP आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब। दिल्ली पुलिस की FIR वाली अर्जी से बढ़ी हलचल
CJP Protest Latest Update: 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मार्च को लेकर तस्वीर अब काफी स्पष्ट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस समय ऐसा मानने का कोई आधार नहीं है कि प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होगी। साथ ही कोर्ट ने आयोजकों और प्रशासन से कानून के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से काम करने की उम्मीद जताई है।
लेकिन इसी मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में 20 से 25 जुलाई के CJP प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग की है। वहीं पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है, जिन्हें वह गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बता रही है।
यानी 5 सितंबर के मार्च से पहले मामला सिर्फ सड़क पर होने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है। अब FIR, सुप्रीम कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर के मार्च पर क्या कहा?
CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर जाने वाला है।
इस मार्च को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कानून-व्यवस्था और दिल्ली में होने वाले BRICS Summit से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी।लेकिन 31 अगस्त को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने तत्काल रोक लगाने वाला आदेश पारित नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन से कोई अप्रिय घटना होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है।
इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होनी है।
इसका मतलब क्या है?
इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने CJP को कोई विशेष अनुमति दे दी है।
अदालत ने फिलहाल प्रस्तावित मार्च पर रोक नहीं लगाई है और कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसले संबंधित प्रशासन पर छोड़े हैं।
CJP और प्रशासन—दोनों से कानून का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।
अब FIR को लेकर क्या हुआ?
यही इस पूरे मामले का सबसे नया और महत्वपूर्ण पहलू है।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन में कहा है कि 20 से 25 जुलाई के CJP प्रदर्शनों से संबंधित 13 FIR को रद्द किया जाए।
लेकिन उसी आवेदन में पुलिस ने 2,873 चिन्हित लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। पुलिस ने इन लोगों को गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया है।
पुलिस के अनुसार प्रस्तावित FIR और आगे की जांच सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश में बताए गए ‘criminal antecedents’ के मानदंड के अनुसार होगी।
CJP आंदोलन से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
केंद्र ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 31 अगस्त को CJI सूर्यकांत की पीठ के सामने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने इसे 1 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी।
यानी आज की तारीख में CJP आंदोलन से जुड़े FIR मामले में सरकार और पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने अलग-अलग आवेदन/रुख दिखाई दे रहे हैं।
CJP फिर से आंदोलन क्यों कर रही है?
CJP ने 25 जुलाई को अपना बड़ा आंदोलन वापस लिया था। इसके बाद संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासन अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं।
NEET से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा...
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर...
पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में जवाबदेही...
जैसे मुद्दे अभी लंबित हैं।
इन्हीं मुद्दों को लेकर CJP ने 5 सितंबर को फिर मार्च का ऐलान किया है। प्रस्तावित मार्च में NEET से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों और जुलाई के प्रदर्शन में कथित पुलिस ज्यादती के पीड़ितों के शामिल होने की बात CJP ने कही है।
5 सितंबर को क्या होगा?
अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार CJP ने 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया है।