बिहार कांग्रेस ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में संगठन विस्तार पर जोर, पुराने कांग्रेसजनों को सम्मान देने की मांग
पटना। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के ओबीसी विभाग की कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण बैठक पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ओबीसी विभाग के अध्यक्ष अनुराग चन्दन ने की। बैठक में संगठन को मजबूत करने, राजनीतिक परिस्थितियों और देश के मौजूदा हालात समेत कई विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और बिहार प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव यादव भी शामिल हुए। नेताओं ने संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में काम करने का संदेश दिया।
संगठन सृजन को गति देने पर चर्चा
बैठक में कांग्रेस के ओबीसी संगठन को जिला और प्रखंड स्तर तक मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यसमिति के सदस्यों ने संगठन के विस्तार और अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को पार्टी की गतिविधियों से जोड़ने को लेकर अपने सुझाव रखे।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए पुराने और अनुभवी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के अनुभव का इस्तेमाल संगठन को मजबूत करने में किए जाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
बांका कांग्रेस की ओर से पुराने नेताओं को सम्मान देने की मांग
बैठक में बांका जिला कांग्रेस कमिटी ओबीसी के अध्यक्ष सुरेश प्रसाद यादव ने संगठन को लेकर कई सुझाव रखे। उन्होंने पुराने और अनुभवी कांग्रेसजनों को उचित सम्मान देने तथा संगठन में उन्हें जिम्मेदारी देने की मांग उठाई।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुरेश प्रसाद यादव की इस मांग पर बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारू की ओर से सहमति जताई गई।
सुरेश यादव का कहना था कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले वरिष्ठ और अनुभवी कार्यकर्ताओं को संगठन में उचित स्थान मिलने से कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिल सकती है।
राजनीतिक मुद्दों और देश के हालात पर भी मंथन
बैठक सिर्फ संगठनात्मक विषयों तक सीमित नहीं रही। इसमें मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और देश के वर्तमान हालात पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने तथा संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की जरूरत पर चर्चा की। ओबीसी संगठन के विस्तार को भी इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
खरगे से जुड़े एक मामले को लेकर सुरेश यादव ने जताई नाराजगी
बैठक के दौरान सुरेश प्रसाद यादव ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान सभामंच और सभा स्थल के शुद्धिकरण को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सुरेश यादव ने इस घटना को लेकर भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाए तथा इसकी आलोचना की।
हालांकि यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे सुरेश प्रसाद यादव के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस संबंध में अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
ओबीसी संगठन को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर नजर
बिहार में राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस का ओबीसी संगठन भी अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कार्यसमिति की बैठक में संगठन विस्तार को प्रमुखता दिए जाने से संकेत मिलता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपने संगठन को सक्रिय करने पर जोर दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में ओबीसी मतदाताओं के बीच संगठन की पहुंच बढ़ाना सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए अहम रणनीतिक विषय है। ऐसे में कांग्रेस के ओबीसी विभाग की गतिविधियां आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने का मुद्दा अहम
बांका जिला कांग्रेस ओबीसी अध्यक्ष सुरेश प्रसाद यादव की ओर से उठाया गया पुराने कांग्रेसजनों को संगठन में सम्मान और स्थान देने का मुद्दा भी पार्टी के अंदर सांगठनिक चर्चा का विषय बन सकता है।
किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए पुराने कार्यकर्ताओं का अनुभव और नए कार्यकर्ताओं की सक्रियता के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस सुझाव को किस रूप में लागू करता है, इस पर आगे नजर रहेगी।
निष्कर्ष
पटना के सदाकत आश्रम में हुई बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ओबीसी कार्यसमिति की बैठक में संगठन विस्तार, राजनीतिक रणनीति और वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा हुई। बांका से पहुंचे सुरेश प्रसाद यादव ने पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सम्मान और संगठन में उचित जिम्मेदारी देने की मांग रखी।
बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया गया। आने वाले दिनों में कांग्रेस का ओबीसी विभाग संगठन विस्तार को लेकर क्या कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
नोट: खरगे से जुड़े कार्यक्रम और शुद्धिकरण को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों को इस रिपोर्ट में संबंधित नेता के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनकी स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।