Sunday, November 08, 2026
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Sunday Special: कंधे पर स्कूल बैग, सामने नदी… बिहार के इन बच्चों की पढ़ाई की तस्वीर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी

INFLOWIRE

Published on Sep 13, 2026 • 60 views
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Sunday Special: स्कूल जाने के रास्ते में आती है नदी… फिर भी बच्चे रुकते नहीं, आखिर किस कीमत पर मिल रही है पढ़ाई?

SUNDAY SPECIAL / INFLOWIRE

सुबह स्कूल जाना था… लेकिन रास्ते में सड़क नहीं, नदी थी

दूसरे बच्चों की तरह इन बच्चों के कंधे पर भी स्कूल बैग है। किसी के हाथ में कॉपी है, किसी के पास किताबें हैं। चेहरों पर वही उत्साह है जो किसी भी बच्चे के स्कूल जाने के समय होता है। लेकिन इन बच्चों के स्कूल जाने का रास्ता सामान्य नहीं है। घर से निकलने के बाद इनके सामने ऐसी बाधा आती है, जिसे पार किए बिना स्कूल पहुंचना संभव नहीं।

एक नदी। न पुल। न पक्की सड़क। और कई जगह सुरक्षित परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं।

बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने इसी वजह से लोगों का ध्यान खींचा है। हाल की रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करने को मजबूर हैं। लेकिन यह सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है।

यह सवाल है कि किसी बच्चे की शिक्षा और उसके स्कूल के बीच अगर नदी खड़ी हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी है?

स्कूल की घंटी बजती है, लेकिन बच्चों का संघर्ष उससे पहले शुरू हो जाता है

हम अक्सर कहते हैं। “बच्चों को पढ़ना चाहिए।” लेकिन क्या सिर्फ स्कूल खोल देना पर्याप्त है?

अगर स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चे को रोज पानी, कीचड़, टूटी सड़क या तेज बहाव का सामना करना पड़े तो क्या स्कूल वास्तव में उसके लिए पहुंच के भीतर है?

यही इस खबर का सबसे बड़ा सवाल है।

किसी बच्चे के लिए स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं होता। स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता भी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है।

अगर रास्ता सुरक्षित नहीं है तो स्कूल मौजूद होने के बावजूद शिक्षा तक पहुंच अधूरी रह जाती है।

बाढ़ खत्म होने के बाद भी खत्म नहीं होती समस्या

बिहार में बाढ़ कोई एक दिन की समस्या नहीं है।

इस साल भी राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का दबाव गंभीर बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों में भागलपुर सहित कई इलाकों में तटबंध टूटने और गांवों में पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

लेकिन बाढ़ का सबसे बड़ा असर सिर्फ घरों और खेतों पर नहीं पड़ता। इसका असर उन रास्तों पर भी पड़ता है जिनसे बच्चे स्कूल पहुंचते हैं।

◆ कहीं सड़क कट जाती है।
◆कहीं पुलिया डूब जाती है।
◆कहीं नाव ही एकमात्र रास्ता बचती है।
◆और कहीं बच्चे खुद अपनी यात्रा को जोखिम में डालकर आगे बढ़ते हैं।

सवाल सिर्फ नदी पार करने का नहीं है

सोशल मीडिया पर जब ऐसी तस्वीर सामने आती है तो कुछ घंटे के लिए चर्चा होती है।

लोग कहते हैं—

“बच्चों का हौसला देखिए।”

● “सरकार को कुछ करना चाहिए।”

● “इनके लिए पुल बनना चाहिए।”

● लेकिन असली सवाल यह है कि इसके बाद क्या होता है?

● क्या अगले साल भी वही बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाएंगे?

● क्या अगले मानसून में भी वही नदी उनके सामने होगी?

● क्या किसी स्थायी पुल या सुरक्षित रास्ते की योजना बनी?

>>> और सबसे महत्वपूर्ण <<<

क्या इन बच्चों से कभी पूछा गया कि उन्हें स्कूल पहुंचने में रोज कितनी मुश्किल होती है?

एक पुल सिर्फ पुल नहीं होता

शहर में रहने वाले किसी व्यक्ति के लिए पुल महज सड़क का एक हिस्सा हो सकता है। लेकिन गांव के बच्चे के लिए एक पुल का मतलब बहुत बड़ा हो सकता है।

पुल का मतलब होता है —

स्कूल तक सुरक्षित पहुंचना। अस्पताल तक जल्दी पहुंचना। बाजार तक आसान से पहुंचना।

किसान की फसल को मंडी तक ले जाने का रास्ता। और किसी परिवार के लिए आपात स्थिति में समय पर मदद मिल जाना । यानी कई बार एक पुल सिर्फ दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि दो जीवन-स्थितियों को भी जोड़ता है।

वायरल वीडियो , फोटो  की असली खबर यहां से शुरू होती है

वायरल वीडियो कुछ सेकंड या कुछ मिनट का हो सकता है।

लेकिन उस वीडियो में दिखाई देने वाले बच्चों की जिंदगी उससे कहीं लंबी है।

उन्हें अगले दिन फिर स्कूल जाना है। फिर वही रास्ता तय करना है। फिर वही नदी सामने आती है।

यही वजह है कि ऐसी तस्वीरों को केवल “वायरल वीडियो” कहकर छोड़ देना इस पूरे खबर या बिहार की इस कहानी को छोटा कर देता है।

असल कहानी वीडियो के बाद शुरू होती है।

क्या व्यवस्था बदलेगी?

क्या डिजिटल इंडिया के दौर में यह तस्वीर हमें परेशान करने वाली नही ?

आज गांवों में इंटरनेट पहुंचाने, डिजिटल शिक्षा बढ़ाने और स्मार्ट क्लास की बातें होती हैं।

बच्चों के हाथ में मोबाइल और ऑनलाइन शिक्षा की चर्चा होती है।

लेकिन दूसरी तरफ अगर वही बच्चा स्कूल पहुंचने के लिए नदी पार करने को मजबूर है, तो विकास की तस्वीर का यह हिस्सा भी देखना जरूरी है। क्योंकि शिक्षा सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन से नहीं आती। शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच भी उतनी ही जरूरी है।

Sunday Special में आज का सबसे बड़ा सवाल ये है कि यह कहानी किसी एक बच्चे की नहीं है।

यह उन तमाम ग्रामीण बच्चों की कहानी है जिनके लिए स्कूल तक पहुंचना शहर के बच्चों की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है। किसी बच्चे को स्कूल पहुंचने के लिए अगर नदी पार करनी पड़े, तो हमें सिर्फ बच्चे के साहस की तारीफ नहीं करनी चाहिए।

हमें यह भी पूछना चाहिए—

“आखिर उसे ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?”

दरअसल यही वो असली सवाल है।

INFLOWIRE NOTE : बैग में किताबें हैं, रास्ते में पानी 

इन बच्चों के कंधे पर स्कूल बैग है। उस बैग में शायद किताबें हैं, कॉपियां हैं और भविष्य के सपने हैं। लेकिन उन सपनों तक पहुंचने के रास्ते में पानी खड़ा है।

बच्चे फिर भी आगे बढ़ रहे हैं।

यही तस्वीर बिहार के ग्रामीण इलाकों की एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है—

बच्चों में पढ़ने की इच्छा हो सकती है, लेकिन व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस इच्छा तक पहुंचने का रास्ता सुरक्षित भी हो।

क्योंकि किसी बच्चे का भविष्य नदी के इस पार या उस पार नहीं होना चाहिए।

भविष्य स्कूल में होना चाहिए। और स्कूल तक पहुंचने का रास्ता सुरक्षित होना चाहिए।

◆ कंधे पर स्कूल बैग था… लेकिन स्कूल पहुंचने से पहले बच्चों के सामने आ गई नदी।

◆ यह सिर्फ वायरल वीडियो नहीं, बिहार की शिक्षा व्यवस्था से पूछा गया एक बड़ा सवाल है।

◆ शहर के बच्चे बस से स्कूल जाते हैं, ये बच्चे नदी पार करके—क्यों?

एक पुल की कमी कितनी बड़ी हो सकती है? इन बच्चों की तस्वीर इसका जवाब देती है।

◆ किताबें बैग में थीं, लेकिन भविष्य तक पहुंचने के रास्ते में पानी खड़ा था।

ये कहानी बिहार के पटना जिला की है।

पटना के बाढ़ इलाके की कहानी: स्कूल जाने के रास्ते में मुहाने नदी, जुगाड़ की नाव और बच्चों के कंधों पर पढ़ाई का बोझ। वैसे ये ताजा मामला तो बिहार के पटना की है लेकिन ऐसी घटनाएं अमूमन बिहार के दर्जनों जिला में घट रही है। अब चाहे दरभंगा हो या रोहतास का हरिबंशपुर या फिर चाहे पश्चिम चंपारण का बगहा हो । इन सब जगह एक जैसी ही कहानी है।

देश के हिस्से भी राज्य में आप हों अगर कोई समस्या या शिकायत की खबर  हो जहाँ पत्रकार नहीं पहुँच पा रहे हैं तो आप उसे INFLOWIRE के COMPLANTS   सेक्शन में भेज दीजिये हमारी टीम आपसे सम्पर्क करेगी और आपकी आवाज को सरकार तक खबर के माध्यम से पहुचाने  का काम करेगी 

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Tags: Bihar Flood Bihar Education Sunday Special Rural Education School Connectivity Bihar News

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