बांका में ₹75 हजार की घूस लेते BDO गिरफ्तार, निगरानी के ट्रैप में ऐसे फंसे; रिश्तेदार भी हिरासत में..... [NEWS DESK INFLOWIRE]
Banka News: बिहार के बांका से मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ₹75 हजार की कथित रिश्वत लेते एक BDO को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान उनके एक रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया गया।
लेकिन मामला सिर्फ 75 हजार रुपये की रकम तक सीमित नहीं है। निगरानी की कार्रवाई के पीछे विकास योजनाओं से जुड़ी शिकायत और उसके बाद हुई जांच की पूरी कहानी है।
आखिर कौन हैं गिरफ्तार BDO?
जिस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है, उनकी पहचान अमित प्रताप सिंह के रूप में हुई है। वह बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) हैं।
निगरानी टीम ने उन्हें बांका शहर की नेहरू कॉलोनी स्थित उनके आवास पर कार्रवाई के दौरान पकड़ा। कार्रवाई मंगलवार सुबह की गई और बाद में BDO तथा उनके रिश्तेदार को पूछताछ के लिए निगरानी टीम अपने साथ ले गई।
शिकायत से शुरू हुई पूरी कहानी
निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले की शुरुआत एक लिखित शिकायत से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक फुल्लीडुमर प्रखंड प्रमुख गौतम प्रकाश ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत की थी। आरोप लगाया गया कि पंचायती राज विभाग से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति और राशि की निकासी के एवज में BDO द्वारा ₹75 हजार की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने सीधे गिरफ्तारी नहीं की। पहले आरोपों का सत्यापन कराया गया। निगरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में शिकायत prima facie सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
मंगलवार सुबह बिछा जाल
1 सितंबर की सुबह पटना से निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम बांका पहुंची। टीम का नेतृत्व DSP श्याम बाबू प्रसाद ने किया। इसके बाद नेहरू कॉलोनी स्थित BDO के आवास पर ट्रैप की कार्रवाई शुरू की गई। जैसे ही शिकायतकर्ता के जरिए कथित तौर पर ₹75 हजार की रकम BDO को दी गई, निगरानी टीम ने कार्रवाई कर दी।
BDO को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
रिश्तेदार तक कैसे पहुंची रकम?
कार्रवाई के दौरान BDO के रिश्तेदार बच्चन कुमार/बच्चन प्रसाद सिंह को भी निगरानी टीम ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक रिश्वत की रकम उनके पास से बरामद हुई। हालांकि मामले की पूरी कानूनी स्थिति और आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
एक दिन पहले ही BDO क्यों थे चर्चा में?
इस मामले को और चर्चा में लाने वाली बात यह है कि 31 अगस्त 2026 को BDO अमित प्रताप सिंह के साथ फुल्लीडुमर प्रखंड कार्यालय परिसर में मारपीट की घटना हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक उस मामले में BDO की शिकायत के आधार पर पूर्व मुखिया के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई थी। इसके ठीक अगले दिन निगरानी विभाग ने BDO को कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार कर लिया। यानी एक ही अधिकारी से जुड़े दो लगातार दिनों के घटनाक्रम ने बांका के फुल्लीडुमर को चर्चा में ला दिया है।
किस काम के बदले मांगी गई थी रकम?
निगरानी विभाग के अनुसार शिकायत में आरोप था कि पंचायती राज विभाग से जुड़ी विकास योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति और राशि की निकासी से संबंधित काम के बदले ₹75 हजार की मांग की गई थी। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
अब आगे क्या होगा?
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने BDO और उनके रिश्तेदार से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की है। इसके बाद मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी। जांच के दौरान शिकायत, ट्रैप कार्रवाई और बरामद रकम से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी।
24 घंटे में बदली पूरी तस्वीर
- फुल्लीडुमर के BDO अमित प्रताप सिंह के लिए पिछले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण रहे।
- 31 अगस्त: प्रखंड कार्यालय में मारपीट की घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
- 1 सितंबर की सुबह: निगरानी टीम ने ₹75 हजार की कथित रिश्वत के मामले में BDO को गिरफ्तार कर लिया।
- 1 सितंबर: कार्रवाई के दौरान उनके रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया गया।
- एक ही अधिकारी से जुड़े इन लगातार घटनाक्रमों ने बांका के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है।
बांका में निगरानी विभाग की कार्रवाई में फुल्लीडुमर BDO अमित प्रताप सिंह को ₹75 हजार की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई 1 सितंबर 2026 की मंगलवार सुबह नेहरू कॉलोनी स्थित उनके आवास पर हुई।
निगरानी विभाग के मुताबिक कार्रवाई फुल्लीडुमर प्रखंड प्रमुख गौतम प्रकाश की शिकायत और उसके सत्यापन के बाद की गई। BDO के एक रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया गया है। अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि पूरे प्रकरण में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।
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