Nepal Tibet Flood: तबाही के बीच 3 हजार लोग लापता, 676 मौतें; भारत भी रेस्क्यू में जुटा, हिमालय पर बढ़ा खतरा
World News: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को झकझोर दिया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा में 676 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 669 और तिब्बत में 7 मौतों की पुष्टि की गई है। कई गांव, सड़कें और पुल बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गए हैं। राहत और बचाव अभियान बेहद मुश्किल परिस्थितियों में जारी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिपोर्टों के अनुसार 93,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। कई इलाकों में सड़क और पुल टूट जाने के कारण राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। मलबे और कीचड़ से भरी सुरंगों में भी लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। रेस्क्यू टीमों ने अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल और चीन तक सीमित नहीं है।
भारत भी राहत और बचाव प्रयासों में मदद कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 11 सदस्यीय टनल-रेस्क्यू टीम नेपाल में बचाव अभियान में शामिल है। टीम को सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने और तकनीकी सहायता देने के लिए लगाया गया है। नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तकनीकी सहायता की अपील की है। चीन की एक टीम भी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने की तैयारी में बताई गई है। इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है।प्रारंभिक रिपोर्टों में ग्लेशियर से जुड़े घटनाक्रम को बाढ़ के संभावित कारणों में बताया गया है। लेकिन किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच जरूरी है।हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं सीमावर्ती देशों के लिए साझा चुनौती बनती जा रही हैं।

नेपाल ने मांगी अंतरराष्ट्रीय मदद
बड़े पैमाने पर हुई तबाही के बाद नेपाल ने खोज और बचाव अभियान के लिए तकनीकी सहायता मांगी है।रिपोर्टों के मुताबिक सुरंगों की खुदाई, DNA पहचान और शवों के प्रबंधन जैसी तकनीकी जरूरतों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग की गई है। पुनर्निर्माण की लागत कई अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान भी सामने आया है। नेपाल भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लोगों का लगातार आवागमन होता है। हिमालयी क्षेत्र में होने वाली बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का असर सीमा-पार संपर्क, पर्यटन, व्यापार और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।इसके अलावा हिमालयी नदियों और ग्लेशियरों से जुड़े घटनाक्रम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नेपाल में हुई इस आपदा पर भारतीय एजेंसियों की नजर रहना स्वाभाविक है।
दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी तनाव जारी
*** नेपाल की आपदा के साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर घटनाक्रम चल रहे हैं।***
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष और प्रतिबंधों का असर ईरान और अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। Reuters की ताजा रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने युद्ध के आर्थिक प्रभाव के बीच व्यापार में भारी गिरावट और महंगाई बढ़ने की बात कही है। रणनीतिक Strait of Hormuz भी इस संघर्ष का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
वहीं यूक्रेन में रूस के हमलों और यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई के बीच संघर्ष और तेज होने के संकेत हैं। AP की रिपोर्ट के अनुसार Kyiv के आसपास रूसी हमले में कम से कम 37 लोगों की मौत हुई है।
Global Picture: दुनिया एक साथ कई संकटों से घिरी
नेपाल-तिब्बत की प्राकृतिक आपदा, ईरान-अमेरिका संघर्ष और यूक्रेन युद्ध—तीनों घटनाक्रम अलग-अलग क्षेत्रों में हैं, लेकिन इनका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मानवीय सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
खासकर ऊर्जा बाजार के लिए मध्य-पूर्व का संकट महत्वपूर्ण है, जबकि हिमालयी आपदा ने जलवायु और आपदा प्रबंधन को लेकर नई चिंता पैदा की है।
नेपाल-तिब्बत की भीषण बाढ़ फिलहाल सबसे बड़ी मानवीय चिंताओं में से एक बनी हुई है। 676 मौतों और करीब 3,000 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट के बीच राहत एवं बचाव अभियान जारी है। भारत समेत कई देश तकनीकी और मानवीय सहायता में योगदान दे रहे हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या को अंतिम आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।