लंदन में मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध,क्या है असली कारण?
London News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर लंदन में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। करीब 20 संगठनों और सामाजिक समूहों से जुड़े लोगों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर RSS से जुड़े किसी कार्यक्रम के लिए Greater London Authority (GLA) की जमीन या परिसर उपलब्ध नहीं कराने की मांग की है।
भागवत 2 से 7 सितंबर 2026 तक ब्रिटेन के दौरे पर हैं। RSS के मुताबिक यह दौरा संगठन के शताब्दी वर्ष के दौरान चल रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है।
मेयर सादिक खान से क्या मांग की गई?
2 सितंबर को जारी खुले पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मेयर कार्यालय से कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इनमें यह आश्वासन भी शामिल है कि मेयर, डिप्टी मेयर, Greater London Authority या MOPAC से जुड़े प्रतिनिधि भागवत के दौरे से संबंधित किसी कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से शामिल नहीं होंगे।
पत्र में यह भी पूछा गया है कि क्या GLA के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कोई जमीन अथवा जगह इस आयोजन के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
इसकेइसकेइसकेइसके अलावा, पत्र लिखने वाले समूहों ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय से भागवत के दौरे को लेकर किए गए सुरक्षा और प्रवेश संबंधी आकलन की जानकारी मांगे जाने की मांग की है। उन्होंने लंदन पुलिस से भी दौरे के दौरान विभिन्न समुदायों की सुरक्षा को लेकर उचित कदम उठाने की अपील की है।
किन संगठनों ने जताया विरोध?
खुले पत्र पर Hindus for Human Rights UK, UK-Indian Muslim Council, India Labour Solidarity, South Asia Solidarity Group, Indus Legacy, Muslim Engagement and Development (MEND), Leicester Council of Mosques और अन्य संगठनों के नाम शामिल हैं।
पत्र में कुल 20 संगठनों तथा संबंधित हस्ताक्षरकर्ताओं का उल्लेख है।
विरोध की वजह क्या बताई गई?
पत्र लिखने वाले संगठनों ने RSS की विचारधारा और भारत में संगठन तथा उससे जुड़े समूहों की गतिविधियों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। उनका आरोप है कि भागवत का ब्रिटेन दौरा RSS की अंतरराष्ट्रीय छवि और प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।
संगठनों ने आशंका जताई है कि इस दौरे से ब्रिटेन में भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों के बीच तनाव तथा ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
भागवत के ब्रिटेन दौरे पर RSS का क्या कहना है?
दूसरी ओर RSS ने भागवत के ब्रिटेन दौरे को संगठन के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा बताया है। RSS के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, सेवा, साझा मूल्यों और सभ्यतागत संवाद जैसे विषयों पर चर्चा को आगे बढ़ाना है।
RSS ने अपनी आधिकारिक जानकारी में कहा है कि भागवत का लंदन दौरा 2 से 7 सितंबर तक है और यह अमेरिका तथा कनाडा के बाद तीन देशों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा है।
अमेरिका के बाद ब्रिटेन में भी विवाद
भागवत के विदेशी दौरे को लेकर अमेरिका में भी विरोध सामने आया था। इसके बाद ब्रिटेन में संगठनों की ओर से मेयर सादिक खान और ब्रिटिश अधिकारियों के सामने आपत्तियां रखी गई हैं।
इस पूरे मामले में फिलहाल मुख्य मुद्दा यह है कि क्या लंदन प्रशासन या GLA भागवत से जुड़े किसी कार्यक्रम के लिए अपनी आधिकारिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा या नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में मेयर सादिक खान की ओर से इस पत्र पर कोई ऐसा निर्णय सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।
मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे ने एक बार फिर RSS की विचारधारा और विदेशों में उसकी गतिविधियों को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ विरोध करने वाले संगठन इसे लेकर सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं RSS अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम को सामाजिक सेवा, संवाद और सद्भाव से जोड़कर पेश कर रहा है।