जंतर-मंतर पर खाना बांटने वाले जुनैद की आपबीती, पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए खाना और पानी उपलब्ध कराने वाले मोहम्मद जुनैद मलिक का मामला अब सिर्फ भोजन की व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। जुनैद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और इस दौरान उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके दावों ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले लोगों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद जुनैद मलिक प्रदर्शनकारियों तक भोजन और पानी पहुंचाने वाले स्वयंसेवकों में शामिल थे। प्रदर्शन स्थल पर भोजन पहुंचाने और लोगों की मदद करने के उनके काम के बाद उनकी भूमिका चर्चा में आई।
इसके बाद जुनैद ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस ने उठाया और एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर पूछताछ की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर रखे जाने और पूरी रात भय की स्थिति में रहने की बात भी कही।
खाने की व्यवस्था के पैसों पर भी पूछताछ का आरोप
जुनैद के मुताबिक, उनसे प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में इस्तेमाल हुए पैसों के स्रोत के बारे में सवाल किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। मीडिया रिपोर्टों में गाजियाबाद पुलिस की ओर से गिरफ्तारी से इनकार किए जाने और जुनैद के पिता से सामान्य पूछताछ की बात कहे जाने का उल्लेख है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
29 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जुनैद मलिक ने अपने साथ कथित कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनके पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें उठाकर पूछताछ की गई और बाद में देहरादून के पास छोड़ दिया गया। उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ किए जाने का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया।
बड़े सवाल, जिनके जवाब जरूरी
इस पूरे मामले में कुछ अहम सवाल सामने आते हैं। प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने वाले स्वयंसेवक से पूछताछ किन परिस्थितियों में की गई? भोजन के लिए जुटाए गए धन के स्रोत की जांच के दौरान क्या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ? और यदि किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
जंतर-मंतर पर भोजन बांटने वाले मोहम्मद जुनैद मलिक का मामला मानवीय सहायता, पुलिस की शक्तियों और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने लाता है। एक ओर जुनैद ने अपने साथ कथित कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए, वहीं पुलिस पक्ष का उपलब्ध बयान अलग तस्वीर पेश करता है।