जामिया में छात्रसंघ चुनाव पर संग्राम! भूख हड़ताल, पुलिस की कार्रवाई से बढ़ा तनाव
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दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया है। छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अड़े हैं। कई दिनों से भूख हड़ताल जारी है, तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमेटी बनाकर चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। लेकिन छात्रों को सिर्फ कमेटी नहीं, चुनाव की निश्चित तारीख चाहिए। आखिर जामिया में छात्रसंघ चुनाव को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?
◆ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में लंबे समय से निर्वाचित छात्रसंघ नहीं है और अब वे चुनाव का स्पष्ट कार्यक्रम चाहते हैं। 12 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई भूख हड़ताल के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि चुनाव की तारीख घोषित की जाए, प्रदर्शन से जुड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए और विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर तथा सुरक्षा सलाहकार को हटाया जाए।
प्रशासन ने क्या कदम उठाया?
विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। प्रशासन के अनुसार, कमेटी को 20 दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट देनी है।
रजिस्ट्रार ने छात्रों से बातचीत के दौरान कहा कि संविधान का मसौदा तैयार होने के बाद छात्रसंघ चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र तत्काल और समयबद्ध चुनाव कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई और ऑनलाइन कक्षाएं
25 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय के गेट नंबर 7 के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हटाया। इससे परिसर के बाहर तनाव की स्थिति बनी रही।
इससे पहले, 24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए अगले आदेश तक सभी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने की घोषणा की थी। पुस्तकालयों को भी अगले आदेश तक बंद रखने की जानकारी दी गई थी।
जामिया में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा अब चुनाव की तारीख, छात्रों पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रशासन के साथ संवाद पर केंद्रित है। एक तरफ प्रशासन संविधान तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ छात्र तत्काल चुनाव कार्यक्रम की मांग पर कायम हैं।
अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।
जामिया का यह विवाद सिर्फ छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठा रहा है कि विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था कब और किस प्रक्रिया के तहत बहाल होगी। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और छात्रों की मांगों पर होने वाली बातचीत पर है।