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DU-JNU में चुनाव, जामिया में 20 साल इंतजार! क्या था पूरा मामला?

Inflowire

Published on Nov 01, 2026 • 57 views
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जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव! आखिर इस यूनिवर्सिटी के साथ ऐसा भेदभाव क्यों?

एक्सप्लेनर | 1 नवंबर 2026 | Inflowire

20 साल तक चुनाव क्यों नहीं?

क्या जामिया के छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया?

एक तरफ दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव होते हैं, दूसरी तरफ JNU में छात्र अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लेकिन देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया में करीब 20 साल तक छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए! आखिर ऐसा क्यों?

क्या जामिया के छात्रों के साथ भेदभाव हुआ? या इसके पीछे प्रशासनिक और कानूनी वजहें थीं?

आज के इस एक्सप्लेनर में दो बड़े सवालों के जरिए समझिए पूरी कहानी।

नंबर 1: आखिर जामिया में 20 साल तक छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं हुए?

जामिया में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2005 में हुए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ को भंग कर दिया।

प्रशासन की दलील थी कि कैंपस में हिंसक घटनाएं हुई थीं और तत्कालीन कुलपति पर हमले जैसी घटनाओं के बाद छात्रसंघ को भंग करने का फैसला लिया गया। वहीं 2012 में राज्यसभा में दिए गए सरकारी जवाब में भी विश्वविद्यालय ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को चुनाव नहीं होने की वजह बताया था। इसके बाद अदालत में लंबित मामले और छात्रसंघ के संविधान को लेकर प्रक्रिया भी चुनाव में बाधा बनी।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इन समस्याओं का समाधान निकालकर चुनाव बहाल नहीं किए जा सकते थे?

आखिर 20 साल का लंबा इंतजार क्यों करना पड़ा?

नंबर 2: क्या जामिया के साथ भेदभाव हुआ?

यह सवाल आज इसलिए उठ रहा है क्योंकि दिल्ली में ही दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं में छात्रसंघ चुनाव होते रहे हैं।

छात्रों का तर्क भी यही रहा कि जब दूसरी यूनिवर्सिटी में चुनाव हो सकते हैं, तो जामिया में क्यों नहीं?

छात्रों ने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, अपनी आवाज और विश्वविद्यालय के फैसलों में भागीदारी के अधिकार की मांग की। आरोप तो ये भी है कि जामिया के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव हुआ।जबकि प्रशासन ने हिंसा, कानून-व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाओं को वजह बताया है।

लेकिन यह सवाल जरूर बनता है कि प्रशासनिक समस्याओं का समाधान निकालने में दो दशक क्यों लग गए?

12 अक्टूबर 2026 से जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। 18 दिनों तक प्रदर्शन चला। छात्र भूख हड़ताल पर बैठे रहे !  आखिरकार 29 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव की समय-सीमा तय कर दी। अब 15 मई 2027 तक छात्रसंघ का संविधान मंजूर और लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। यानी अगस्त 2027 के अंत तक चुनाव होने की समय-सीमा बनती है। प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ जारी शो-कॉज नोटिस, निलंबन, निष्कासन और कैंपस प्रवेश प्रतिबंध वापस लेने का भी आदेश दिया है।

इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।

जामिया की यह कहानी सिर्फ एक छात्रसंघ चुनाव की कहानी नहीं है। यह सवाल है छात्रों की भागीदारी का, उनके प्रतिनिधित्व का और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक व्यवस्था का।

सवाल यह भी है कि अगर किसी विश्वविद्यालय में कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक समस्याएं हैं, तो उसका समाधान चुनाव रोकना होना चाहिए या व्यवस्था सुधारकर छात्रों को प्रतिनिधित्व देना?

20 साल का इंतजार अब खत्म होने की दिशा में है। लेकिन असली परीक्षा मई 2027 की समय-सीमा और उसके बाद होने वाले चुनाव की होगी।
 

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Tags: Jamia Millia Islamia Student Union Election Jamia Protest Delhi University JNU Education News

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