बारिश के बाद जाले में सड़क बनी दलदल, स्कूली बच्चों की परेशानी का जिम्मेदार कौन?
Inflowire Explainer | दरभंगा
दरभंगा, 26 सितंबर 2026। बारिश के बाद गांवों की खराब सड़कें सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं रहतीं। इसका सीधा असर बच्चों की स्कूल तक पहुंच, बुजुर्गों की आवाजाही और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। दरभंगा के जाले प्रखंड की सहसपुर पंचायत के वार्ड 12 से सामने आई तस्वीर इसी बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है।
23 सितंबर से लगातार हुई बारिश के बाद यहां का मुख्य रास्ता कीचड़ में बदल गया है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 से 150 घरों के लोग इस रास्ते से प्रभावित हैं। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
सड़क पर चलना मुश्किल, बच्चों की राह सबसे कठिन
बारिश के बाद मिट्टी वाले रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रास्ते पर फिसलने की समस्या बढ़ गई है और दोपहिया वाहनों के पहिए भी कीचड़ में फंस रहे हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए समस्या और गंभीर है। सुबह घर से निकलने के बाद उन्हें इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के दौरान कपड़े और जूते खराब होने से लेकर फिसलकर गिरने तक का खतरा बना रहता है।
यानी मामला सिर्फ सड़क की खराब हालत का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या गांव के बच्चों को बारिश के मौसम में सुरक्षित रास्ते से स्कूल पहुंचने का अधिकार नहीं होना चाहिए?
समस्या आज की बारिश से पैदा नहीं हुई
स्थानीय लोगों के अनुसार इस सड़क की समस्या पुरानी है। बारिश ने सिर्फ उस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले रास्ते पर मिट्टी डाली गई थी, लेकिन लगातार बारिश के बाद वही मिट्टी कीचड़ में बदल गई। ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।
अगर रास्ता स्थायी रूप से बनाया गया होता या जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो लगातार बारिश के दौरान स्थिति इतनी खराब होती या नहीं, यह प्रशासनिक समीक्षा का विषय है।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, जवाबदेही का भी है
किसी ग्रामीण सड़क की स्थिति खराब होने पर पूरी जिम्मेदारी केवल मौसम पर डालना सही नहीं है।
ऐसे में तीन वो सवाल जो जनप्मरतिनिधियों के साथ साथ प्रशासन पर भी घूमता हुआ दिख रहा है--
सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पर अब तक स्थायी काम क्यों नहीं हुआ?
बारिश के मौसम से पहले ऐसे कमजोर रास्तों की पहचान और अस्थायी मरम्मत क्यों नहीं की गई?
जब तक स्थायी सड़क नहीं बनती, तब तक स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए तत्काल क्या व्यवस्था की जा सकती है?
इन सवालों का जवाब संबंधित पंचायत और प्रशासन से मिलना जरूरी है।
पंचायत प्रतिनिधि ने दिया आश्वासन
इस समस्या को लेकर पंचायत समिति सदस्य अन्नु झा ने संज्ञान लेने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने दुर्गापूजा से पहले सड़क निर्माण कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया है।
अब ग्रामीणों की नजर इस आश्वासन के क्रियान्वयन पर है। क्योंकि बारिश के दौरान कीचड़ से जूझना और फिर अगले साल उसी समस्या का दोबारा सामने आना स्थायी समाधान नहीं है।
प्रशासन के सामने तत्काल क्या विकल्प हैं?
स्थायी सड़क बनने में समय लग सकता है। लेकिन बारिश के बीच ग्रामीणों को राहत देने के लिए प्रशासन तत्काल स्तर पर कुछ कदम उठा सकता है। जैसे -
अत्यधिक कीचड़ वाले हिस्से में तत्काल आवागमन योग्य सामग्री डालना।
जलनिकासी की व्यवस्था की जांच करना।
स्कूल जाने वाले रास्ते को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित करना।
सड़क निर्माण की स्थिति और जिम्मेदार विभाग की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करना।
स्थायी सड़क निर्माण की समयसीमा तय करना।
इन उपायों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, लेकिन बच्चों और ग्रामीणों को तत्काल राहत मिल सकती है।
Inflowire का बड़ा सवाल
अगर सड़क की समस्या वर्षों पुरानी है, तो क्या हर बारिश के बाद ग्रामीणों को उसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा?
स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना आखिर किसकी जिम्मेदारी है पंचायत, स्थानीय निकाय या संबंधित सड़क निर्माण विभाग?
इन सवालों का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि जमीन पर होने वाले काम से मिलेगा।
जाले के सहसपुर पंचायत की यह समस्या दरभंगा के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान सामने आने वाली उस चुनौती की तस्वीर है, जिसमें खराब सड़क, जलनिकासी और बुनियादी ढांचे की कमी एक साथ दिखाई देती है।
बारिश रुकने के बाद कीचड़ सूख सकता है, लेकिन सड़क की मूल समस्या अपने आप खत्म नहीं होगी। इसलिए जरूरत तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी सड़क निर्माण और जलनिकासी की योजना पर काम करने की है।