India News: अगले 10 साल में 100 नए एयरपोर्ट बनाने की तैयारी, ₹30 हजार करोड़ खर्च की योजना
नई दिल्ली: भारत के एविएशन सेक्टर को अगले दशक में बड़ा विस्तार देने की तैयारी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए अगले 10 वर्षों में करीब ₹30,000 करोड़ खर्च कर देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना है।
मंत्री ने यह बात 1 सितंबर 2026 को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही। इसी कार्यक्रम में देश की तीसरी ‘हब एंड स्पोक’ सेवा की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य यात्रियों को क्षेत्रीय हवाई अड्डों के जरिए बड़े एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से बेहतर कनेक्टिविटी देना है।
2014 से अब तक एयरपोर्ट में कितना इजाफा?
नायडू के अनुसार वर्ष 2014 में देश में 74 एयरपोर्ट थे जबकि अब भारत के हवाई नक्शे पर इनकी संख्या 166 तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में लगभग हर 40 दिन में किसी नए एयरपोर्ट या नए टर्मिनल का काम पूरा हुआ है। सरकार अब इसी विस्तार को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रही है।
UDAN योजना के तहत बढ़ेगा क्षेत्रीय हवाई संपर्क
100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना को केंद्र की क्षेत्रीय संपर्क योजना UDAN यानी ‘उड़े देश का आम नागरिक’ के अगले चरण से जोड़ा गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य छोटे शहरों और क्षेत्रीय इलाकों को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराना है। इससे उन क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है जहां अभी हवाई यात्रा की सुविधा सीमित है।
सरकार की योजना का असर केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, कारोबार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
Modified UDAN को 10 साल के लिए मिली मंजूरी
इससे पहले मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Modified UDAN योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 10 वर्षों के लिए लागू करने को मंजूरी दी थी। इसके लिए कुल ₹28,840 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
यही वजह है कि नई घोषणा को समझते समय ₹30,000 करोड़ की मंत्री द्वारा बताई गई आगामी योजना और कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ₹28,840 करोड़ के प्रावधान को एक ही आंकड़ा मानना सही नहीं होगा। दोनों का संदर्भ अलग है।
2036 तक कितने एयरपोर्ट हो सकते हैं?
मौजूदा संख्या 166 और अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट की योजना को आधार मानें तो संख्या बढ़कर करीब 266 तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह गणना मौजूदा संख्या और घोषित लक्ष्य पर आधारित है; इसे सरकार द्वारा घोषित अंतिम 2036 की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
अगर योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है तो छोटे शहरों से हवाई यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं। यात्रियों को बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए लंबी सड़क या रेल यात्रा पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है।
क्षेत्रीय एयर कनेक्टिविटी बढ़ने से स्थानीय कारोबार, पर्यटन और रोजगार से जुड़े अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, किसी खास शहर में एयरपोर्ट कब बनेगा या वहां से नियमित उड़ान कब शुरू होगी, यह अलग-अलग परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
भारत सरकार अगले दशक में एयर कनेक्टिविटी के विस्तार पर बड़ा जोर दे रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री का 100 नए एयरपोर्ट और करीब ₹30,000 करोड़ के निवेश का बयान इसी दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। अब इस योजना का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित परियोजनाएं किस गति से जमीन पर उतरती हैं और कितने छोटे शहरों को नियमित हवाई सेवा से जोड़ा जाता है।