दिल्ली की यमुना कब साफ होगी? 249 MLD सीवेज के बीच जनता के सवाल
Inflowire Desk / Delhi / 23 Sep 2026
नई दिल्ली: दिल्ली में यमुना की सफाई लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। लेकिन हालिया पर्यावरणीय रिपोर्टों ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि शहर में निकलने वाले सीवेज को नदी तक पहुंचने से रोकने और उसका पर्याप्त उपचार करने की व्यवस्था वास्तव में कितनी प्रभावी है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT के समक्ष दाखिल एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में रोजाना करीब 249 मिलियन लीटर सीवेज प्रतिदिन (MLD) ऐसा है जो उपचार व्यवस्था के बाहर रह जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 22 प्रमुख सीवेज नालों में से 12 अब भी पूरी तरह टैप नहीं किए गए हैं।
दूसरी ओर, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की अगस्त की जल गुणवत्ता जांच से संबंधित रिपोर्ट में वजीराबाद से ओखला के बीच यमुना में सीधे गिरने वाले 22 नालों में से 14 में निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों से अधिक प्रदूषण पाए जाने की बात सामने आई है। शाहदरा और बारापुल्ला समेत कुछ नालों को विशेष रूप से प्रदूषित बताया गया है।
सवाल सिर्फ यमुना का नहीं, शहर की व्यवस्था का है
यमुना दिल्ली के लिए सिर्फ एक नदी नहीं है। इसके प्रदूषण का संबंध सीवेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नालों की निगरानी और शहर के विस्तार से भी जुड़ा है।
अगर शहर में प्रतिदिन हजारों लाख लीटर सीवेज पैदा होता है, तो उसके संग्रह, उपचार और निस्तारण की पूरी श्रृंखला कितनी प्रभावी है—यह सवाल आम नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है।
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| दिल्ली में पैदा होने वाले हर दिन के सीवेज का कितना हिस्सा वास्तव में ट्रीट होकर निकलता है? |
| जो 249 MLD सीवेज उपचार व्यवस्था से बाहर बताया गया है, उसे सिस्टम में शामिल करने की समयसीमा क्या है? |
| 22 में से 12 नालों के पूरी तरह टैप नहीं होने की स्थिति कब तक दूर होगी? |
| जिन नालों का पानी यमुना में पहुंच रहा है, उनकी लगातार निगरानी कौन करता है? |
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और वास्तविक उपयोग में कितना अंतर है?
- अगर किसी नाले के पानी में तय मानक से ज्यादा प्रदूषण मिलता है तो जिम्मेदारी किस विभाग की तय होती है?
- जनता को यमुना की सफाई पर खर्च होने वाली राशि और उसके वास्तविक परिणामों की जानकारी किस स्तर पर मिलती है?
अब निगाह कार्रवाई पर
दिल्ली में सीवेज प्रबंधन और यमुना प्रदूषण को लेकर सरकारी विभागों की ओर से अलग-अलग सुधार योजनाएं चल रही हैं। NGT के समक्ष दिल्ली जल बोर्ड ने भी सीवेज को रोकने, डायवर्ट करने और ट्रीट करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी है। लेकिन जनता के लिए सबसे अहम सवाल योजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि नतीजे की समयसीमा है।
यमुना में प्रदूषण घटेगा कब?
कितना सीवेज नदी तक पहुंचना बंद होगा?
और इन लक्ष्यों की निगरानी कौन करेगा?
यमुना की सफाई पर बहस कई वर्षों से चल रही है। अब जरूरत इस बात की है कि आंकड़ों और घोषणाओं के साथ मापने योग्य परिणाम और स्पष्ट जवाबदेही भी सामने आए।
जनता का सवाल सीधा है—अगर सीवेज को नदी तक पहुंचने से रोकना ही समाधान की पहली शर्त है, तो दिल्ली में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होने की तारीख क्या है?