Delhi Building Collapse Fact Check: सत्य निकेतन हादसे के नाम पर वायरल हो रहे ये वीडियो असली हैं या पुराने? जानिए पूरा सच
Viral Fact Check: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। इन वीडियो को हादसे की तस्वीर बताकर लोगों के बीच प्रसारित किया जा रहा है। लेकिन जांच में सामने आया है कि वायरल किए जा रहे सभी वीडियो सत्य निकेतन हादसे के नहीं हैं।
कुछ वीडियो पुराने हैं, जबकि कुछ को गलत संदर्भ के साथ शेयर किया जा रहा है। एक वायरल वीडियो के बारे में फैक्ट-चेक में AI-generated होने की भी बात सामने आई है।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के बाद अलग-अलग वीडियो शेयर किए गए। पोस्ट में दावा किया गया कि ये वीडियो उसी हादसे के दौरान बनाए गए हैं और इनमें घटनास्थल की स्थिति दिखाई दे रही है।
वीडियो तेजी से शेयर होने के कारण कई यूजर्स ने बिना इसकी वास्तविकता जांचे इन्हें सत्य निकेतन हादसे से जोड़ दिया।
Fact Check में क्या सामने आया?
फैक्ट-चेक के दौरान वायरल वीडियो की तस्वीरों और वीडियो की जांच की गई। जांच में पाया गया कि सभी वीडियो 6 सितंबर 2026 के सत्य निकेतन हादसे के नहीं हैं। पांच वायरल वीडियो की पड़ताल की गई। इनमें तीन वीडियो पुराने पाए गए, जबकि अन्य दो में से एक को AI-generated और दूसरे को अलग घटना से संबंधित बताया गया।
इसका मतलब यह है कि सोशल मीडिया पर एक ही घटना के नाम पर अलग-अलग समय और स्थान के वीडियो जोड़कर शेयर किए जा रहे थे।
एक वीडियो का संबंध उत्तर प्रदेश से निकला
एक अन्य फैक्ट-चेक में सामने आया कि सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के नाम से शेयर किया जा रहा एक वीडियो वास्तव में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का है।
वीडियो में दिख रही घटना को दिल्ली की घटना बताना गलत पाया गया।
यानी वीडियो वास्तविक हो सकता है, लेकिन उसे किसी दूसरी घटना के साथ जोड़कर पेश किया गया हो तो दावा फिर भी गलत हो जाता है।
AI से बना वीडियो भी वायरल
फैक्ट-चेक में वायरल Video के एक हिस्से को AI-generated बताया गया है। ऐसे वीडियो पहली नजर में वास्तविक घटना जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनमें दृश्य, लोगों की गतिविधियां या इमारत की संरचना वास्तविक फुटेज से मेल नहीं खाती। यही वजह है कि किसी बड़ी घटना के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए हर वीडियो को तुरंत सच मानना जोखिम भरा हो सकता है।
लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
किसी हादसे या आपदा के दौरान वीडियो तेजी से वायरल होते हैं। ऐसे समय में वीडियो शेयर करने से पहले कुछ बातों की जांच जरूरी है।
वीडियो कब का है?
पुराना वीडियो अक्सर नई घटना के नाम पर दोबारा वायरल किया जाता है।
वीडियो कहां का है?
सिर्फ पोस्ट के कैप्शन पर भरोसा करने के बजाय स्थान की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।
क्या किसी विश्वसनीय स्रोत ने इसकी पुष्टि की है?
पुलिस, प्रशासन और विश्वसनीय समाचार संस्थानों की जानकारी को प्राथमिकता देना बेहतर है।
वीडियो में असामान्य दृश्य तो नहीं?
AI-generated सामग्री में चेहरे, हाथ, वस्तुएं, लिखावट या आसपास की चीजों में असामान्य बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
INFLOWIRE FACT ; वीडियो वायरल है, लेकिन हर वीडियो सत्य निकेतन का नहीं
सत्य निकेतन हादसे के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सभी वीडियो घटनास्थल के नहीं हैं। कुछ पुराने हैं, कुछ दूसरी जगहों की घटनाओं से जुड़े हैं और एक वीडियो को AI-generated बताया गया है।
इसलिए वायरल वीडियो को बिना सत्यापन के आगे शेयर करना उचित नहीं है।
INFLOWIRE Fact Check: किसी वायरल वीडियो को देखकर निष्कर्ष निकालने से पहले उसकी तारीख, स्थान और मूल स्रोत की पुष्टि करें। यही सही डिजिटल पत्रकारिता और जिम्मेदार सोशल मीडिया इस्तेमाल का तरीका है।
डिस्क्लेमर: यह फैक्ट-चेक उपलब्ध जांच रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।