New Delhi : आरक्षण विरोधी आंदोलन में क्यों बढ़ा विवाद? हर्ष दुबे की ब्रजेश पाठक से मुलाकात के बाद सामने आया मतभेद
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद आंदोलन के भीतर ही मतभेद सामने आने लगे हैं। 21 अगस्त को हुए प्रदर्शन के बाद आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल हर्ष दुबे की उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कुछ प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए हैं।
हर्ष दुबे की ब्रजेश पाठक से मुलाकात पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हर्ष दुबे और छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। इसके बाद दोनों की ओर से बातचीत को लेकर जानकारी सामने आई। ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों और चिंताओं को केंद्र सरकार के नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा और संबंधित केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने की कोशिश की जाएगी। इसी मुलाकात को लेकर आंदोलन से जुड़े दूसरे लोगों में नाराजगी की बात सामने आई है। उनका सवाल है कि जब आंदोलन की मांगें केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के सामने रखने की बात हो रही थी, तो उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की गई।
क्या आंदोलन दो भागों में बंट रहा है?
मुलाकात के बाद आंदोलन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर बहस तेज होने की खबर है। कुछ कार्यकर्ताओं ने हर्ष दुबे की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति के नेतृत्व में नहीं बल्कि सामूहिक रूप से चल रहा है। वहीं, हर्ष दुबे ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई दी है। उनके मुताबिक सरकार को उनकी मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया गया है। यदि तय समय में मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो दोबारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की बात कही गई है।
21 अगस्त को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
आरक्षण सुधार की मांग को लेकर 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचे थे। दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच प्रदर्शन स्थल को लेकर भी गतिरोध की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थान पर जाने के लिए कहा था, जबकि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही रहने पर अड़े रहे। बाद में रैली को रामलीला मैदान में आयोजित करने की अनुमति दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने की खबरों का खंडन किया था। पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ दावों को भ्रामक बताया था।
अब आगे क्या होगा?
हर्ष दुबे की ओर से सरकार को दिए गए समय के बाद आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों के बीच नेतृत्व और बातचीत के तरीके को लेकर मतभेद सामने आने से इसकी आगे की दिशा भी महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत के लिए आगे बढ़ती है और क्या आंदोलन से जुड़े विभिन्न समूह एक साझा रणनीति पर सहमत हो पाते हैं।
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