मोनू कुमार की मौत पर मंत्री मदन सहनी ने दरभंगा पुलिस पर उठाए सवाल, बोले- अपराधियों से ज्यादा पुलिस का डर
INFLOWIRE / DARBHANGA
Darbhanga News: दरभंगा के खराजपुर में 20 वर्षीय मोनू कुमार की मौत के मामले ने अब राजनीतिक और पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी ने दरभंगा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मोनू कुमार की मौत के बाद उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, खराजपुर निवासी मोनू कुमार ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि मोबाइल से जुड़े एक मामले में पुलिसकर्मियों ने युवक पर कार्रवाई का दबाव बनाया था। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में पहुंचे थे और युवक को केस में फंसाने की बात कहकर कथित तौर पर बड़ी रकम देने का दबाव बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी बाकी है।
पुलिस के दोबारा पहुंचने पर हुआ विवाद
मोनू की मौत के बाद जब पुलिसकर्मी दोबारा गांव पहुंचे तो स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की बात सामने आई है। परिजनों की ओर से पुलिस पर फायरिंग का आरोप भी लगाया गया। हालांकि, पुलिस ने फायरिंग के आरोप से इनकार किया है। मामले को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है।
मंत्री मदन सहनी ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल
मोनू कुमार के परिजनों से मुलाकात के बाद मंत्री मदन सहनी ने दरभंगा पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आम लोगों में पुलिस को लेकर डर पैदा होना गंभीर स्थिति है। मंत्री ने पुलिसकर्मियों पर कथित अवैध वसूली के आरोपों की जांच की मांग की और कहा कि पूरे मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दरभंगा के एसएसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
पुलिस और परिवार के आरोपों की जांच जरूरी
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मोनू कुमार की मौत से पहले उसके साथ पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी और क्या उस पर किसी तरह का दबाव बनाया गया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में पुलिस की भूमिका, घटनास्थल के CCTV फुटेज और संबंधित मोबाइल बरामदगी की पूरी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और पुलिस पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।