Ground Report: सरकारी नल-जल योजना का जमीनी सच! कहीं टंकी गायब, कहीं पाइप बेकार, कहीं नल सूखा; अलीनगर में ‘हर घर नल का जल’ पर बड़े सवाल
Darbhanga Ground Report: सरकारी योजनाओं का दावा कागज पर कुछ और हो और जमीन पर तस्वीर कुछ और—तो सवाल उठना लाजिमी है। बिहार में हर घर नल का जल योजना का उद्देश्य लोगों के घर तक पाइप के जरिए पेयजल पहुंचाना है।
बात अगर किसी एक प्रखंड की करें तो शायद ये बेमानी होगी। हाँ लेकिन जब बात ग्राउंड रिपोर्ट की हो तब किसी न किसी प्रखंड की ही चर्चा की जाएगी।उसी आधार पर दरभंगा के अलीनगर प्रखंड से सामने आ रही जमीनी तस्वीर इस योजना के क्रियान्वयन और रखरखाव पर सवाल खड़े करती है।
Inflowire की Ground Report में आज हम पहुंचे हैं दरभंगा के अलीनगर प्रखंड, जहां स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की शिकायत है कि कई जगह नल-जल योजना का ढांचा मौजूद होने के बावजूद लोगों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है। कहीं नल लगा है लेकिन पानी नहीं आता, कहीं पाइपलाइन खराब है, कहीं टंकी या उसके सिस्टम में समस्या है तो कहीं योजना का पूरा ढांचा ही उपयोग में नहीं दिखता।
सरकार की योजना क्या कहती है?
बिहार सरकार के हर घर नल का जल कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी इलाकों के घरों तक पाइप के माध्यम से पेयजल पहुंचाना है। सरकारी जानकारी के मुताबिक इसके तहत अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से घरों तक पाइप जलापूर्ति उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यानी योजना का असली मकसद सिर्फ नल लगाना नहीं, बल्कि घर तक नियमित और उपयोगी पेयजल पहुंचाना है। लेकिन सवाल यही है—क्या अलीनगर में यह उद्देश्य जमीन पर पूरा हो रहा है?
अलीनगर में Ground Reality क्या कहती है?
अलीनगर प्रखंड के जिन इलाकों में Inflowire की टीम पहुंची, वहां स्थानीय लोगों ने नल-जल योजना से जुड़ी कई समस्याएं बताईं। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर योजना का बुनियादी ढांचा तो दिखाई देता है, लेकिन उससे नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही।
कहीं नल है लेकिन पानी नहीं। कहीं पाइपलाइन है लेकिन सप्लाई बंद है।कहीं टंकी और उससे जुड़े सिस्टम के रखरखाव पर सवाल है। और कुछ जगहों पर ग्रामीणों को आज भी वैकल्पिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यही वह तस्वीर है जिसे सरकारी योजना की सफलता का वास्तविक पैमाना माना जाना चाहिए। नल लगा देने से योजना पूरी मानी जाएगी?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
अगर किसी घर के बाहर नल लगा दिया गया, लेकिन उससे महीनों तक पानी नहीं आया, तो क्या उस परिवार को वास्तव में नल का जल मिल गया? अगर पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन पाइप क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी घर तक नहीं पहुंच रहा, तो जिम्मेदारी किसकी है? और अगर टंकी बन गई लेकिन उसका संचालन और रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा, तो उस पर खर्च हुई सरकारी राशि का लाभ लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा? इन सवालों का जवाब कागजी उपलब्धि से नहीं, बल्कि मौके पर जाकर देना होगा।
सरकारी पैसे का दुरुपयोग हुआ या रखरखाव की कमी?
अलीनगर की इस Ground Report में सबसे गंभीर सवाल यही है। क्या योजना के निर्माण में सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है? या फिर योजना का निर्माण तो हुआ, लेकिन बाद में मेंटेनेंस और संचालन की कमी के कारण व्यवस्था खराब हो गई? फिलहाल केवल मौके की स्थिति देखकर सरकारी राशि के दुरुपयोग का अंतिम निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा। इसके लिए योजना की स्वीकृत राशि, कार्यादेश, भुगतान विवरण, निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव का रिकॉर्ड और वास्तविक जलापूर्ति की जांच जरूरी है।
दरभंगा में पहले भी सामने आ चुकी हैं नल-जल योजना की शिकायतें
दरभंगा जिले के जाले प्रखंड से मई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी हर घर नल का जल योजना के ठप होने, पाइपलाइन टूटने और टंकी से जुड़ी समस्या की बात सामने आई थी। यह दिखाता है कि जिले में योजना के संचालन और रखरखाव को लेकर शिकायतें पहले भी सामने आती रही है। हालांकि जाले की स्थिति को अलीनगर की स्थिति का प्रमाण नहीं माना जाएगा। अलीनगर में वास्तविक स्थिति के लिए स्थानीय स्तर पर अलग जांच जरूरी है।
शिकायत के लिए सरकार ने बनाया है आधिकारिक सिस्टम
दिलचस्प बात यह है कि बिहार सरकार के PHED ने Nal Jal Shikayat नाम से आधिकारिक मोबाइल प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया है। इसके जरिए नागरिक नल में पानी नहीं आने, कम दबाव और लीकेज जैसी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं और शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद उसका समाधान कितनी जल्दी और कितनी स्थायी तरीके से होता है? सरकार ने घर-घर नल का जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन किसी योजना की सफलता का पैमाना नल की संख्या नहीं, नल से निकलने वाला पानी होना चाहिए। अलीनगर में अगर नल मौजूद है लेकिन पानी नहीं आता, पाइप बिछी है लेकिन सप्लाई नहीं है और टंकी बनी है लेकिन सिस्टम काम नहीं कर रहा, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
Inflowire की Ground Report सिर्फ सवाल नहीं उठा रही—हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि इस योजना पर कितना पैसा खर्च हुआ, किस एजेंसी ने काम किया और खराब व्यवस्था को ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी है।
आगे भी जारी रहेगी पड़ताल
यह Ground Report का पहला हिस्सा है। संबंधित अधिकारियों और विभाग का पक्ष मिलने के बाद उसे भी इस खबर में शामिल किया जाएगा।
आपके गांव में भी नल-जल योजना बंद है?
हमें अपनी समस्या, गांव/पंचायत का नाम और मौके की फोटो या वीडियो भेजें। आपकी जानकारी की स्वतंत्र रूप से जांच के बाद उसे Ground Report का हिस्सा बनाया जाएगा।