Inflowire Explainer: क्या इम्तियाज नूरानी की एंट्री से दरभंगा स्नातक सीट पर बदल सकता है वोटों का समीकरण?
दरभंगा | 29 सितंबर 2026 | Inflowire
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अब एक नए राजनीतिक समीकरण की ओर बढ़ता दिख रहा है। राजद ने अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज ने अपने पहले घोषित प्रत्याशी रवींद्र कुमार यादव की जगह डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को मैदान में उतारा है। जन सुराज ने नूरानी के नाम की घोषणा 28 सितंबर को की।
नूरानी की एंट्री के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मुस्लिम मतदाताओं के संभावित रुझान को लेकर हो रही है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नूरानी की उम्मीदवारी राजद के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन में सेंध लगा सकती है?
लेकिन इस सवाल का जवाब सीधे तौर पर “मुस्लिम वोट राजद से टूटकर जन सुराज में जाएगा” कहना अभी संभव नहीं है। इसकी वजह इस चुनाव की अलग प्रकृति और मतदाता सूची है।
>>अब ऐसे में एक सवाल जो इस समय कानाफूसी के केंद्र में है वो ये कि__क्या दरभंगा स्नातक चुनाव में मुस्लिम वोट राजद और जन सुराज के बीच बंट सकता है?
राजनीतिक चर्चा में राजद के MY यानी मुस्लिम-यादव सामाजिक आधार की बात लंबे समय से होती रही है। लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग है।
यहां वोट डालने वाला व्यक्ति सामान्य विधानसभा मतदाता भर नहीं होता। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वही व्यक्ति मतदाता बन सकता है जो संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी हो और निर्धारित शर्तों के साथ कम-से-कम तीन साल पहले स्नातक या समकक्ष योग्यता हासिल कर चुका हो।
यानी यहां जाति या धर्म के साथ-साथ शिक्षा, पेशा, व्यक्तिगत संपर्क और उम्मीदवार की स्थानीय पहचान भी चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो जाती है।
दरभंगा स्नातक सीट पर करीब 1.27 लाख मतदाता दर्ज ।
इसलिए केवल मुस्लिम आबादी के सामान्य आंकड़ों के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि मुस्लिम स्नातक मतदाता किस उम्मीदवार के साथ जाएगा ये कहना बिल्कुल भी सही नही है ।
>>तब एक और सवाल चर्चा में है तो फिर नूरानी की उम्मीदवारी क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
जन सुराज ने 20 सितंबर को पहले रवींद्र कुमार यादव को उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन 28 सितंबर को पार्टी ने उनका टिकट बदलकर डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी को उम्मीदवार बना दिया।
नूरानी मधुबनी के बिस्फी क्षेत्र से आते हैं। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस चुनाव में चर्चा का हिस्सा बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 2020 में कांग्रेस के टिकट पर एमएलसी चुनाव लड़ा था। इसलिए उनकी उम्मीदवारी को केवल “मुस्लिम उम्मीदवार” के रूप में देखना चुनाव की पूरी तस्वीर नहीं बताता।
उनकी चुनौती यह होगी कि वे अपनी पहचान को समुदाय से आगे बढ़ाकर पूरे स्नातक मतदाता वर्ग तक कितना ले जा पाते हैं।
>>तो फिर क्या जन सुराज ने राजद के वोट को बांटने की रणनीति बनाई?
यह एक राजनीतिक संभावना है, लेकिन इसे सीधे आरोप की तरह नही कहा जा सकता है। हर पार्टी जीत के उद्देश्य से ही उमीदवार तय करती है,इम्तियाज नूरानी भी राजनीति का एक पाठ है। हालांकि नूरानी ने कांग्रेस छोड़ने की वजह क्लीयर कर दिया है।उधर जन सुराज ने नूरानी को उम्मीदवार क्यों बनाया, पार्टी ने इसकी विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। और एक दूसरी बात कोई भी पार्टी उमीदवार उतारने के पीछे की विस्तृत वजह नही बताती है।
>> क्या नूरानी की उम्मीदवारी राजद के पारंपरिक सामाजिक आधार में सेंध लगाने की क्षमता रखती है, या स्नातक मतदाता उम्मीदवार और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अलग मतदान करेंगे?
इसका जवाब चुनाव प्रचार के अगले चरण में दिखाई दे सकता है।
इस चुनाव में सिर्फ MY समीकरण क्यों पर्याप्त नहीं?
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव विधानसभा क्षेत्र जैसा सीधा चुनाव नहीं है।
यहां मतदाता संख्या सीमित और पात्रता आधारित है। इसलिए किसी पार्टी का सामान्य विधानसभा वोट प्रतिशत सीधे स्नातक चुनाव में ट्रांसफर हो जाए, यह मान लेना सही नहीं होगा।
इसके अलावा अनिल कुमार झा के पक्ष में राजद ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की बैठक में प्रखंड स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं को उठाने पर चर्चा हुई है। झा ने मतदाता सूची में 10 हजार से अधिक नामों/विवरणों में कथित त्रुटियों का मुद्दा भी उठाया है।
इससे साफ है कि मुकाबला सिर्फ सामाजिक समीकरण का नहीं, बल्कि मतदाता संपर्क, संगठन, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और मतदाता सूची प्रबंधन का भी है।
नूरानी से राजद को कितना नुकसान? अभी तीन बातें तय करेंगी
◆मुस्लिम स्नातक मतदाताओं का वास्तविक रुझान
◆नूरानी की व्यक्तिगत पकड़
नूरानी का पिछला चुनावी अनुभव और क्षेत्र में सामाजिक संपर्क उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन यह देखना होगा कि वे इसे मौजूदा स्नातक मतदाता सूची में कितने वोटों में बदल पाते हैं।
◆राजद का संगठन और अनिल कुमार झा का संपर्क अभियान
राजद ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। अब उसके सामने चुनौती होगी कि वह अपने संगठन और सामाजिक समर्थन को स्नातक मतदाताओं में कितना प्रभावी ढंग से बदल पाते हैं।
Inflowire Explainer का निष्कर्ष
इम्तियाज नूरानी की एंट्री ने दरभंगा स्नातक चुनाव को निश्चित रूप से बहुकोणीय मुकाबले की दिशा में धकेला है। लेकिन इसे अभी सीधे-सीधे “राजद का मुस्लिम वोट दो हिस्सों में बंट गया” कहना जल्दबाजी होगी।
क्योंकि यहां सवाल केवल यह नहीं है कि कौन मुस्लिम है और किस पार्टी के साथ जाता है।
असल सवाल है कि—दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पात्र मुस्लिम मतदाता आबादी में नूरानी को व्यक्तिगत कितना स्वीकार करती है?
और दूसरा—क्या नूरानी अपनी उम्मीदवारी को मुस्लिम मतदाताओं से आगे बढ़ाकर यादव, सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा और अन्य स्नातक मतदाताओं के बीच भी समर्थन में बदल पाते हैं?
इसी तरह राजद के लिए भी चुनौती सिर्फ अपना पारंपरिक सामाजिक आधार बनाए रखना नहीं, बल्कि अनिल कुमार झा के पक्ष में पूरे स्नातक मतदाता वर्ग का समर्थन जुटाना भी होगा।
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि नूरानी की उम्मीदवारी ने वोटों के संभावित विभाजन का नया सवाल जरूर खड़ा किया है, लेकिन वास्तविक वोट ट्रांसफर का अनुमान अभी उपलब्ध आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता।
बिहार विधान परिषद की इन सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।