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48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, अब 2 अक्टूबर को क्या करेगा CJP?

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Published on Sep 29, 2026 • 81 views
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Inflowire Special Report

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी CJP, 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान; अब सुप्रीम कोर्ट में भी SIR पर सुनवाई

नई दिल्ली | 29 सितंबर 2026

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही Cockroach Janta Party (CJP) ने 48 घंटे का अपना अल्टीमेटम खत्म होने के बाद भी पीछे हटने से इनकार किया है।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 28 सितंबर को कहा कि संगठन 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगा और जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रखने की बात कही।

48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, अब 2 अक्टूबर पर नजर

CJP ने 24 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि मांग नहीं मानी गई तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा और इसे उसके पहले के जंतर-मंतर आंदोलन की तर्ज पर आगे बढ़ाया जाएगा।

48 घंटे की समयसीमा समाप्त होने के बाद CJP ने अपना अगला कदम 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने के रूप में बताया है।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अभी दिल्ली पुलिस की अनुमति नहीं मिली है, जबकि CJP की ओर से देश के दूसरे हिस्सों में भी आंदोलन की बात कही गई है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

CJP का अभियान ऐसे समय में सामने आया जब SIR और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता जोड़ने-हटाने, Form 6 और चुनावी डेटा से जुड़े कुछ फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कम-से-कम 14 मौकों का उल्लेख किया गया है।

CJP का कहना है कि इन आपत्तियों और SIR से जुड़े रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले किस प्रक्रिया से लिए गए।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर किसी विभाजन या असहमति को उस अर्थ में स्वीकार नहीं किया है, जैसा विवाद में बताया जा रहा है। आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, लिखित टिप्पणियां और आंतरिक जांच सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

यानी इस पूरे विवाद में दो अलग दावे सामने हैं—CJP और कुछ रिपोर्टों में निर्णय प्रक्रिया पर सवाल, जबकि ECI का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।

CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?

CJP ने अपने अभियान में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे उठाए हैं:

पहला— CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयोग से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र जांच।

दूसरा— SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक, रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना और प्रभावित मतदाताओं के लिए समीक्षा/बहाली की व्यवस्था।

तीसरा— मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की मांग।

CJP ने चुनाव आयोग के सामने मौजूद आंतरिक आपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड और जवाब भी सार्वजनिक करने की मांग की है।

अब सुप्रीम कोर्ट का नया घटनाक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?

इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और देशव्यापी SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई है।

याचिका में दावा किया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले चुनाव आयोग के सभी सदस्यों की सामूहिक सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून का हवाला देते हुए इन फैसलों की न्यायिक जांच की मांग की है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ द्वारा अगले सप्ताह की जा सकती है।

यह सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही CJP के आंदोलन से अलग कानूनी घटनाक्रम है। कोर्ट ने अभी याचिका में लगाए गए आरोपों को सही नहीं ठहराया है।

Inflowire Explainer: असली सवाल क्या है?

इस पूरे विवाद को केवल “CJP बनाम चुनाव आयोग” के रूप में देखना अधूरा होगा। इसे इस तरह देखना चाहिए।—

◆क्या चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होगा?
◆ SIR में हटाए गए नामों की जांच और बहाली की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है?
◆ सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है?

अगर अदालत मामले की सुनवाई करती है तो चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े कानूनी सवालों पर न्यायिक परीक्षण का रास्ता खुल सकता है। हालांकि अदालत ने अभी इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

CJP ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की ; CEC के इस्तीफे की मांग जारी है ।

दिल्ली पुलिस: जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति अभी लंबित है मतलब नहीं मिली है।

चुनाव आयोग: SIR से जुड़े अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताता है और आंतरिक मतभेद को लेकर उठाए गए दावों की अलग व्याख्या करता है।

सुप्रीम कोर्ट: CEC के कामकाज और SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार; अगली सुनवाई अगले सप्ताह संभावित है।

अब ऐसे में CJP का 48 घंटे वाला अल्टीमेटम अब आंदोलन के अगले चरण में बदल गया है। 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन पर अब नजर रहेगी। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट में SIR और CEC की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई का रास्ता खुलना इस विवाद को सड़क के आंदोलन से अदालत की जांच तक ले जाता है।

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Tags: CJP Election Commission Gyanesh Kumar SIR चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार CJP Protest 2 October Protest Supreme Court Election Commission News

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