Fact Check: क्या UN में भारत के राजदूत ने इजरायल को हथियार देने पर ये बयान दिया? वायरल वीडियो की पूरी सच्चाई
एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रहा है। दावा है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने इजरायल को भारत के हथियार निर्यात और युद्ध में होने वाली मौतों को लेकर विवादित टिप्पणी की। जांच में वीडियो का ऑडियो-बयान मूल वीडियो से मेल नहीं मिला। PIB Fact Check ने भी इसे फर्जी और AI-generated बताया है।
नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026 | INFLOWIRE
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल है, जिसे देखकर पहली नजर में यह किसी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय बैठक का वास्तविक फुटेज लगता है। वीडियो में भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश दिखाई देते हैं और उनकी आवाज में इजरायल को भारत के हथियार निर्यात से जुड़ी बातें सुनाई देती हैं।
वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि भारतीय राजनयिक ने इजरायल को हथियारों की आपूर्ति का बचाव करते हुए यह बयान दिया। लेकिन यहां कहानी का सबसे अहम हिस्सा वीडियो में दिखाई देने वाला चेहरा नहीं, बल्कि उसके साथ जोड़ी गई आवाज और बयान है।
वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पोस्ट में वीडियो को इस दावे के साथ शेयर किया गया कि भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में Amnesty International के भारत से इजरायल को हथियारों की कथित आपूर्ति संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।
वायरल क्लिप में उनके नाम से ऐसे शब्द सुनाए जा रहे हैं जिनमें युद्ध में होने वाली मौतों को लेकर टिप्पणी और भारत के रक्षा निर्यात का बचाव करने का दावा किया गया है।
वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि देखने वाले को लगे कि यह संयुक्त राष्ट्र की बैठक का वास्तविक बयान है।
लेकिन जांच में यह दावा सही नहीं पाया गया।
हमने क्या जांचा?
सबसे पहले वायरल वीडियो के दृश्य की तुलना भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन के आधिकारिक वीडियो से की गई।
16 सितंबर 2026 को भारत के संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधि के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया था। उसमें पार्वथनेनी हरीश उसी तरह के कपड़ों और पृष्ठभूमि में दिखाई देते हैं जैसी वायरल क्लिप में दिखती है।
यहीं से मामले की अहम कड़ी सामने आती है।
मूल वीडियो में वह कथित बयान मौजूद नहीं है।
आधिकारिक वीडियो के ट्रांसक्रिप्ट को देखने पर भी वायरल क्लिप में सुनाई देने वाली बातें नहीं मिलतीं। यानी वायरल वीडियो में वास्तविक दृश्य का इस्तेमाल करके उसके ऊपर बदली हुई आवाज जोड़े जाने के संकेत मिलते हैं।
PIB Fact Check ने क्या कहा?
भारत सरकार की Fact Check Unit ने भी इस वायरल वीडियो को फर्जी बताया है।
सरकारी तथ्य-जांच के अनुसार वीडियो AI-generated है और पार्वथनेनी हरीश ने वायरल क्लिप में दिखाया गया कथित बयान नहीं दिया था।
असली वीडियो में क्या था?
जांच में मिले आधिकारिक वीडियो और उसके ट्रांसक्रिप्ट से पता चलता है कि वास्तविक वीडियो में भारतीय प्रतिनिधि ने वायरल क्लिप में बताए गए इजरायल और Amnesty International संबंधी कथित बयान नहीं दिए थे।
यानी वीडियो में व्यक्ति वास्तविक है, लेकिन उसके मुंह से वायरल कराए जा रहे शब्द वास्तविक नहीं हैं।
यही इस Fact Check का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
AI Deepfake का नया खतरा क्या है?
कुछ साल पहले फर्जी खबरों में तस्वीरों और पुराने वीडियो को नए घटनाक्रम से जोड़कर पेश किया जाता था। अब चुनौती एक कदम आगे बढ़ चुकी है। किसी वास्तविक व्यक्ति का वास्तविक वीडियो लेकर उसमें AI से आवाज या बयान बदल दिया जाए, तो केवल चेहरा देखकर वीडियो की सत्यता तय करना मुश्किल हो सकता है। इस मामले में भी यही सवाल सामने आया—अगर वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में वही है, तो क्या उसकी आवाज में कही गई हर बात भी वास्तविक है?
इसलिए सोशल मीडिया पर किसी बड़े अधिकारी, राजनयिक, अभिनेता या नेता का वीडियो सामने आने पर केवल चेहरे और आवाज के आधार पर उसे वास्तविक मान लेना उचित नहीं है।
कैसे पहचानें ऐसा AI वीडियो?
किसी वायरल वीडियो में अगर कोई बेहद बड़ा या विवादित बयान सुनाई दे तो तीन स्तर पर जांच की जा सकती है।
पहला—मूल वीडियो खोजें।
क्या वही वीडियो संबंधित संस्था या अधिकारी के आधिकारिक अकाउंट पर मौजूद है?
दूसरा—ट्रांसक्रिप्ट मिलाएं।
वीडियो में कही गई बात और आधिकारिक भाषण/ट्रांसक्रिप्ट एक जैसी हैं या नहीं?
तीसरा—आधिकारिक प्रतिक्रिया देखें।
बड़े सरकारी या राजनयिक बयान के मामले में संबंधित मंत्रालय, मिशन या PIB Fact Check की जानकारी देखना जरूरी है।
PIB के मुताबिक उसकी Fact Check Unit सरकारी दावों की जांच के लिए आधिकारिक सरकारी स्रोतों, प्रेस रिलीज और संबंधित विभागों से मिली जानकारी का इस्तेमाल करती है।
वायरल वीडियो में भारत के संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश के वास्तविक वीडियो फुटेज का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उनके नाम से जो बयान प्रसारित किया गया वह मूल वीडियो और आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट में नहीं मिलता। PIB Fact Check ने वीडियो को AI-generated/fake बताया है।