दरभंगा में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी तेज, क्लेम केस के निपटारे पर जोर; अधिवक्ताओं के साथ हुई बैठक
दरभंगा, 22 अगस्त 2026: आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर दरभंगा में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिक से अधिक लंबित मामलों के आपसी समझौते के आधार पर निपटारे को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दावा वाद यानी क्लेम केस से जुड़े मामलों के निपटारे को लेकर संबंधित अधिवक्ताओं के साथ बैठक आयोजित की गई।
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बैठक में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम उपेन्द्र कुमार और जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने क्लेम केस से संबंधित अधिवक्ताओं के साथ मामलों के शीघ्र निष्पादन को लेकर चर्चा की। बैठक के दौरान एडीजे उपेन्द्र कुमार ने कहा कि क्लेम केस के मामलों में आपसी सुलह और समझौते के जरिए विवाद का समाधान होने की संभावना रहती है। यदि दावाकर्ता और बीमा कंपनी के बीच समझौते के लिए सार्थक पहल की जाए तो कई मामलों का आसानी से निपटारा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समझौते के माध्यम से मामलों का निष्पादन होने से संबंधित पक्षों को राहत मिल सकती है और न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिलेगी। एडीजे ने संबंधित अधिवक्ताओं से पक्षकारों के बीच समझौते की संभावनाओं को तलाशने और मामलों के निष्पादन में सहयोग करने की अपील की।
12 सितंबर को होगी राष्ट्रीय लोक अदालत
दरभंगा में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन प्रस्तावित है। इसको लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने कहा कि प्रयास है कि आगामी लोक अदालत में पिछले आयोजनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया जाए। इसके लिए लंबित मामलों के निपटारे और पक्षकारों के बीच समझौते की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेहतर निष्पादन के जरिए जिले को सम्मानित स्थान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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लोक अदालत का महत्व : लोक अदालत विवादों के आपसी समझौते से समाधान का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक माध्यम है। इसमें ऐसे मामलों का निपटारा किया जा सकता है जिनमें कानून के तहत समझौते की गुंजाइश होती है। लोक अदालत का उद्देश्य लंबित विवादों का आपसी सहमति से समाधान कर पक्षकारों को राहत देना और न्यायालयों पर लंबित मामलों के बोझ को कम करना है।हालांकि प्रत्येक मामला लोक अदालत में समझौते के लिए उपयुक्त नहीं होता। मामले की प्रकृति और लागू कानून के आधार पर इसकी उपयुक्तता तय होती है।
बैठक में अधिवक्ता ध्रुव कुमार ठाकुर, चंद्रधर मल्लिक, मंजू झा, जवाहर कुमार झा, हरिवंश कुमार कर्ण, सोहन कुमार सिन्हा, सुरेंद्र कुमार, कौशलेंद्र नारायण श्रीवास्तव, मोहम्मद मकसूद, प्रकाश कुमार राजू और पूनम कुमारी मौजूद रहे।
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