Sunday, November 08, 2026
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एक जमीन पर दो दावेदार! दरभंगा के बहेड़ा में पुराने सर्वे से लेकर दाखिल-खारिज तक उलझा मामला

INFLOWIRE

Published on Sep 09, 2026 • 132 views
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दरभंगा के बहेड़ा में एक जमीन पर दो स्वामित्व का दावा, अमीन से नापी को लेकर बढ़ा विवाद; पुलिस ने कराया शांत

दरभंगा/बहेड़ा: दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना क्षेत्र के जोघट्टा गांव में जमीन के स्वामित्व को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसमें एक ही जमीन पर दो अलग-अलग पक्ष अपना-अपना अधिकार होने का दावा कर रहे हैं। विवाद उस समय और चर्चा में आ गया, जब एक पक्ष की ओर से अलीनगर अंचल के सरकारी अमीन को बुलाकर जमीन की नापी कराने की कोशिश की गई।

मामले में एक पक्ष जमीन पर लंबे समय से अपने परिवार का कब्जा होने और पुराने राजस्व रिकॉर्ड में पूर्वजों के नाम दर्ज होने का दावा कर रहा है। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि उसने संबंधित जमीन को पोहद्दी गांव के पूर्वे परिवार से विधिवत लिखवाया है।

क्या है पूरा मामला?

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार जोघट्टा गांव में स्थित एक जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। राकेश यादव का दावा है कि उक्त जमीन उनके परिवार के कब्जे में पूर्वजों के समय से रही है।

राकेश यादव के अनुसार 1972 के सर्वे रिकॉर्ड में भी जमीन उनके पूर्वजों के नाम दर्ज थी। उनका यह भी कहना है कि वर्तमान नया खतियान उनके नाम पर है। इसी आधार पर वह जमीन पर अपना अधिकार होने का दावा कर रहे हैं।

राकेश यादव का आरोप है कि अब एक तीसरा पक्ष कहीं अन्य स्थान से जमीन की रजिस्ट्री कराकर सरकारी अमीन को लेकर उक्त जमीन की नापी कराने पहुंचा।

हालांकि, दूसरे पक्ष की ओर से इसका अलग दावा किया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन उन्होंने पोहद्दी के पूर्वे परिवार से रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी है।

दाखिल-खारिज बना विवाद की बड़ी वजह

मामले में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है।

बताया जाता है कि रामकुमार सहनी ने जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया था। उस समय अलीनगर के तत्कालीन अंचलाधिकारी ने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद अंचलाधिकारी के बदलने के बाद दाखिल-खारिज को स्वीकृति मिलने की बात सामने आई। इसी के बाद जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद और अधिक बढ़ गया।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अलग-अलग दस्तावेजों और दावों के बीच वास्तविक स्वामित्व किसका है। इसका निर्धारण केवल मौके पर नापी कराने से नहीं, बल्कि संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, पुराने सर्वे दस्तावेज, रजिस्ट्री दस्तावेज, दाखिल-खारिज रिकॉर्ड और अन्य वैध कागजात की जांच के आधार पर ही किया जाएगा।

सरकारी अमीन को लेकर पहुंचे तो बढ़ा विवाद

मामले में उस वक्त तनाव की स्थिति बनी, जब जमीन की नापी के लिए अलीनगर अंचल के सरकारी अमीन के पहुंचने की जानकारी सामने आई।

एक पक्ष ने इसका विरोध किया और जमीन पर अपने पुराने कब्जे तथा राजस्व रिकॉर्ड का हवाला दिया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना था कि जमीन की रजिस्ट्री उनके पक्ष में हुई है और इसी आधार पर वह अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं।

विवाद बढ़ने की सूचना के बाद बहेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत की।

बहेड़ा पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला कराया शांत

मौके पर पहुंची बहेड़ा थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर तत्काल विवाद को शांत कराया। फिलहाल किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

हालांकि, जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के दावे अभी भी कायम हैं। ऐसे में विवाद का स्थायी समाधान संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और संवैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही संभव होगा।

एक जमीन, दो दावे और कई सवाल

इस मामले ने स्थानीय स्तर पर जमीन के रिकॉर्ड और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर एक पक्ष के पास पुराने सर्वे रिकॉर्ड और नया खतियान होने का दावा है और दूसरे पक्ष के पास रजिस्टर्ड डीड के आधार पर जमीन खरीदने का दावा है, तो संबंधित दस्तावेजों की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सिर्फ दाखिल-खारिज हो जाने से जमीन के स्वामित्व का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इसी तरह केवल पुराने कब्जे का दावा भी अपने आप में स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं होता। जमीन का वास्तविक अधिकार संबंधित दस्तावेजों और कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी/अदालत द्वारा तय किया जा जाएगा।

प्रशासन के सामने क्या है चुनौती?

ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने और नए राजस्व रिकॉर्ड के साथ-साथ जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करना होता है।

जोघट्टा गांव के इस मामले में भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि—

◆ 1972 के सर्वे रिकॉर्ड में जमीन किसके नाम दर्ज थी?
◆ वर्तमान खतियान में किसका नाम दर्ज है?
◆ रामकुमार सहनी ने जमीन किससे और किस दस्तावेज के आधार पर खरीदी?
◆ पूर्वे परिवार के पास जमीन के स्वामित्व का आधार क्या था।
◆ दाखिल-खारिज पर पहले रोक किस आधार पर लगी थी?
◆ बाद में दाखिल-खारिज स्वीकृत करने का आधार क्या रहा?
◆ सरकारी अमीन को नापी के लिए किस आदेश या आवेदन के आधार पर भेजा गया था?

इन सभी सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल विवाद शांत,लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं

बहेड़ा थाना पुलिस के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच स्थिति शांत है। लेकिन जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और दावों के आधार पर जमीन पर अधिकार जता रहे हैं। ऐसे में आगे राजस्व विभाग की जांच और जरूरत पड़ने पर न्यायिक प्रक्रिया से ही इस विवाद का अंतिम समाधान निकलने की उम्मीद दिखती नजर आ रही है।

INFLOWIRE की पड़ताल में फिलहाल दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से दस्तावेजी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस रिपोर्ट में किसी भी पक्ष के दावे को जमीन के स्वामित्व का अंतिम सत्य नहीं माना गया है।

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