दरभंगा समेत बिहार के 40 बाल गृहों में अब नहीं होगी वाहन की परेशानी, अस्पताल-कचहरी जाने के लिए 24 घंटे मिलेगी खास सुविधा
दरभंगा, 28 अगस्त 2026।
बिहार के बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के लिए राज्य सरकार ने अहम सुविधा की तैयारी की है। अब बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल या न्यायालय में पेशी के लिए ले जाने के दौरान वाहन की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। समाज कल्याण विभाग की नई व्यवस्था के तहत राज्य के 40 बाल गृहों को एक-एक चारपहिया वाहन उपलब्ध कराया जाएगा।
इस खबर का सीधा असर बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के सुरक्षित और समय पर आवागमन से जुड़ा है। खास बात यह है कि वाहन की सुविधा सातों दिन 24 घंटे उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है।
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दरभंगा के बाल गृहों के लिए भी महत्वपूर्ण व्यवस्था
दरभंगा समेत बिहार के अलग-अलग हिस्सों में समाज कल्याण विभाग के तहत बाल गृह संचालित किए जाते हैं। यहां रहने वाले बच्चों को कई बार स्वास्थ्य जांच, इलाज अथवा न्यायालय से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया के लिए बाहर ले जाना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में बाल गृहों को वाहन की उपलब्धता के लिए अलग से इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे बच्चों के आवागमन को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
40 बाल गृहों को मिलेगा एक-एक वाहन
विभागीय जानकारी के अनुसार राज्य के 40 विभिन्न बाल गृहों के लिए एक-एक चारपहिया वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। इन वाहनों का इस्तेमाल बच्चों को अस्पताल, न्यायालय और जरूरत के अनुसार अन्य निर्धारित स्थानों तक ले जाने के लिए किया जाएगा। अब तक जरूरत पड़ने पर ऑटो, रिक्शा या उपलब्ध अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता था। नई व्यवस्था से इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है।
24 घंटे उपलब्ध रहेगा वाहन, आपात स्थिति में भी मदद
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात वाहन की उपलब्धता का समय है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने वाले वाहन 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध रहेंगे। इसका फायदा खासतौर पर आपात स्थिति में हो सकता है। यदि किसी बच्चे को अचानक अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है, तो वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पहले से रहेगी।
हर वाहन के लिए ₹75 हजार प्रतिमाह
विभागीय जानकारी के मुताबिक प्रत्येक वाहन के लिए ₹75 हजार प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जाएगा। यह व्यवस्था एक वर्ष के लिए मंजूर की गई है।
40 वाहनों के लिए एक साल में कुल ₹3.60 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
बच्चों की सुरक्षा और सुविधा पर जोर
बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के लिए अस्पताल और न्यायालय जैसी जगहों तक सुरक्षित पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में अलग वाहन की व्यवस्था से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि जरूरत के समय परिवहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी। समाज कल्याण विभाग की यह पहल बाल गृहों में रह रहे बच्चों की आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके सुरक्षित, सुगम और समय पर आवागमन की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।