कागज पर नलकूप, खेत में पानी नहीं! बेनीपुर में अधिकारियों से बोले विधायक- किसानों को परेशान किया तो जवाबदेही तय होगी!
दरभंगा/बेनीपुर, 18 सितंबर 2026: बेनीपुर में सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा के दौरान एक ऐसा सवाल सामने आया, जिसका सीधा संबंध खेत और किसान से है। बैठक में नलकूपों की संख्या और उनकी तकनीकी स्थिति की जानकारी रखी गई, लेकिन चर्चा का केंद्र यह रहा कि सरकारी योजनाएं अगर मौजूद हैं तो उनका पानी किसानों के खेत तक कितना पहुंच रहा है?
बेनीपुर एसडीओ कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने अधिकारियों से नलकूपों की स्थिति पर जानकारी ली। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक क्षेत्र में 50 राजकीय नलकूप और 21 उद्वह सिंचाई योजनाएं हैं। इनमें कई नलकूप बिजली या तकनीकी समस्या के कारण प्रभावित बताए गए।
बैठक में असली सवाल क्या उठा?
सिंचाई योजना का रिकॉर्ड तैयार होना और खेत में पानी पहुंचना दो अलग बातें हैं। यही अंतर बैठक में भी दिखाई दिया।
अधिकारियों की ओर से खराब नलकूपों और बिजली संबंधी समस्याओं की जानकारी दी गई। इसके बाद विधायक ने किसानों को परेशान न करने और खराब व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करने पर जोर दिया।
अब किसानों की नजर किस पर?
बैठक में निर्देश और आश्वासन अपनी जगह हैं, लेकिन किसान के लिए असली बदलाव तब माना जाएगा जब बंद नलकूप दोबारा चलेंगे और खेतों तक सिंचाई पहुंचेगी।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सिंचाई व्यवस्था और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर है?
अधिकारियों को खराब नलकूपों और बिजली संबंधी समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम करना है। इसके बाद इसकी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी कि जिन नलकूपों को ठीक करने की बात कही गई है, वे वास्तव में कब चालू होते हैं।
बेनीपुर की इस बैठक की सबसे बड़ी कहानी यही है—किसानों को कागज पर नहीं, खेत में पानी चाहिए।