दरभंगा : पहले तीन लोगों को पकड़ा, ग्रामीणों ने छुड़ाया; दोबारा पहुंची पुलिस तो घिर गई गाड़ी, आरोपी ने चलती बोलेरो से लगाई छलांग
दरभंगा के मनीगाछी में पुलिस कार्रवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने शराब और नशे के खिलाफ अभियान के साथ-साथ कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान पहले हिरासत में लिए गए तीन लोगों को ग्रामीणों ने छुड़ा लिया। दोबारा गिरफ्तारी के लिए पहुंची टीम ने एक आरोपी को पकड़ा, लेकिन लौटते समय पुलिस वाहन को रोककर पथराव किया गया। इसी दौरान आरोपी ने भी चलती गाड़ी से कूदने की कोशिश की।
दरभंगा | 18 सितंबर 2026 | INFLOWIRE
मनीगाछी के बघांत गांव के पासवान टोला में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुआ विवाद अब सिर्फ एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं रह गया है। मामले में पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त होने, एक एएसआई के घायल होने और गिरफ्तार आरोपी के भी जख्मी होने की बात सामने आई है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शुरुआत कहां से हुई?
पुलिस के मुताबिक, बघांत गांव के पासवान टोला में कुछ लोगों के नशे की हालत में हंगामा करने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तीन लोगों को हिरासत में लिया।
यहीं से मामला उलझ गया।
पुलिस का आरोप है कि अजय पासवान नामक व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों से उलझकर हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ा लिया। इसके बाद पुलिस टीम को वापस लौटना पड़ा। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू की।
दूसरी बार पुलिस पहुंची तो क्या हुआ?
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस टीम दोबारा बघांत गांव पहुंची। इस बार पुलिस ने अजय पासवान को पकड़ लिया।
लेकिन गिरफ्तारी के बाद थाने लौट रही पुलिस टीम के सामने फिर स्थिति बिगड़ गई।
पुलिस के मुताबिक, गांव से कुछ दूरी पर कुछ युवकों ने पुलिस वाहन के आगे बाइक लगा दी। इसके बाद वाहन पर पत्थर फेंके गए। पथराव में पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और एएसआई राजेश सिंह घायल हो गए।
चलती गाड़ी से कूदने की कोशिश क्यों हुई?
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान गिरफ्तार अजय पासवान ने भी पुलिस वाहन का पिछला शीशा तोड़कर चलती गाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश की। वह घायल हो गया और बाद में उसे डीएमसीएच के कैदी वार्ड में पुलिस अभिरक्षा में भर्ती कराया गया।
यानी एक ही कार्रवाई में पुलिस टीम पर पथराव, सरकारी वाहन को नुकसान और गिरफ्तार आरोपी के घायल होने की तीन अलग-अलग घटनाएं सामने आईं।
लेकिन आरोपी की कहानी अलग है
इस मामले में डीएमसीएच में इलाज करा रहे अजय पासवान ने पुलिस के आरोपों से अलग दावा किया है। उसका कहना है कि उसने पहले पकड़े गए युवकों को ग्रामीणों के साथ मिलकर छुड़ाया था। उसने पुलिस पर मारपीट और जातिसूचक गाली देने के आरोप भी लगाए हैं।
दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी इन आरोपों से अलग अपनी कार्रवाई को सही बता रहे हैं। बेनीपुर एसडीपीओ के अनुसार, पुलिस टीम पर हमला किया गया और इसी वजह से वाहन क्षतिग्रस्त हुआ तथा एक पुलिसकर्मी घायल हुआ।
असली सवाल क्या है?
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पुलिस वाहन पर पथराव किसने किया।
जांच को यह भी स्पष्ट करना होगा कि—
- पहली कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए तीन लोगों को कैसे छुड़ाया गया?
- दूसरी बार पुलिस पहुंचने पर कितने लोग वहां मौजूद थे?
- पुलिस वाहन पर पथराव किसने किया?
- आरोपी चलती गाड़ी से कैसे और क्यों कूदा?
- पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच कैसे होगी?
पुलिस ने मामले में कांड संख्या 267/26 दर्ज कर जांच शुरू की है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस के आरोप और आरोपी की ओर से लगाए गए आरोप—दोनों को जांच के निष्कर्ष के साथ देखना जरूरी है ।
दरभंगा के मनीगाछी की यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला एक सामान्य गिरफ्तारी से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और स्थानीय प्रतिरोध की स्थिति तक पहुंच गया है।
शराब और नशे के खिलाफ कार्रवाई पुलिस के नियमित अभियान का हिस्सा है, लेकिन किसी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस टीम को घेरना, सरकारी वाहन पर पथराव होना और फिर गिरफ्तार व्यक्ति का घायल होना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर घटनाक्रम है।
अब इस मामले में आगे की पुलिस जांच यह तय करेगी कि घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका थी और दोनों पक्षों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।