स्वतंत्र भारद्वाज कौन है? बिहार से दिल्ली तक की कहानी, जंतर-मंतर विवाद और गिरफ्तारी की पूरी टाइमलाइन
नई दिल्ली/बुलंदशहर: सोशल मीडिया पर चर्चित नाम स्वतंत्र भारद्वाज शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। कार्रवाई जंतर-मंतर पर हुए एक विवाद और मारपीट के मामले में हुई है, जिसमें छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार को चोट लगने का आरोप है।
इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पुराना पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में उसने संजय कुमार को चोट पहुंचाने की बात कही और दावा किया कि इसके बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा। इसके बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, FIR की धाराओं और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे।
स्वतंत्र भारद्वाज कौन है?
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज करीब 21 वर्ष का सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है। वह खुद को हिंदुत्व और सनातन से जुड़े मुद्दों पर मुखर बताता रहा है और सोशल मीडिया पर उसके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल और पुराने वीडियो में राजनीतिक तथा सामाजिक मुद्दों पर उसके तीखे विचार दिखाई देते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह खुद को 'Sanatani Yodha' जैसे शब्दों से भी संबोधित करता रहा है।
बिहार से दिल्ली कैसे पहुंचा स्वतंत्र भारद्वाज?
यह सवाल भी इस समय काफी चर्चा में है कि स्वतंत्र भारद्वाज आखिर कहां का रहने वाला है और दिल्ली कैसे पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों में उसे पटना के कंकड़बाग का निवासी बताया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उसके बिहार के दूसरे हिस्से से संबंध का भी उल्लेख हुआ है, इसलिए उसके मूल निवास को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। लेकिन FIR से संबंधित रिपोर्ट में उसका पता पटना के कंकड़बाग से जुड़ा बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक भारद्वाज ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने की बात खुद कही है। दिल्ली आने के बाद वह विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में दिखाई देने लगा।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
पूरे विवाद की शुरुआत 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई घटना से हुई। FIR के मुताबिक, उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़े प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार अपनी बेटी निशु आजाद और एक अन्य व्यक्ति के साथ वहां मौजूद थे। शाम करीब 5:30 बजे संजय कुमार प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल फोन से कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने उनसे पूछा कि वह उसकी वीडियो क्यों बना रहे हैं। संजय कुमार का आरोप है कि बातचीत विवाद में बदल गई और इसके बाद दो-तीन अन्य लोग भी वहां पहुंच गए। शिकायत के मुताबिक उनके साथ मारपीट की गई और सिर पर मुक्का मारने के अलावा किसी कठोर वस्तु से चोट पहुंचाई गई। पुलिस के पहुंचने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को मौके से पकड़ा गया था, जबकि अन्य लोग वहां से निकल गए थे।
संजय कुमार को कितनी चोट लगी?
संजय कुमार को इलाज और मेडिकल जांच के लिए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। FIR से संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल जांच में उनके सिर पर दो कटे हुए घाव (lacerated wounds) दर्ज किए गए थे।
यहीं से बाद में विवाद और ज्यादा बढ़ा।
स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल पॉडकास्ट बयान में सिर की गंभीर चोट और बड़ी संख्या में टांके लगने जैसी बातें कही गईं। लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट को सामान्य प्रकृति की बताया गया था और खोपड़ी टूटने की बात मेडिकल रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होती। पुलिस के मुताबिक चोट कड़े यानी kada से लगी थी।
FIR में कौन-कौन सी धाराएं लगी थीं?
दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
उपलब्ध FIR संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआती धाराएं थीं . BNS धारा 115(2), BNS धारा 126(2), BNS धारा 3(5)
FIR में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार का नाम आरोपी के तौर पर सामने आया था।
पुलिस का कहना था कि दोनों को मौके पर रोका गया, पूछताछ की गई और बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस दिया गया। यही वजह थी कि शुरुआती मामले में स्वतंत्र भारद्वाज जेल नहीं गया था।
फिर मामला दोबारा इतना बड़ा कैसे हो गया?
कई हफ्तों बाद एक पॉडकास्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इस वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते हुए संजय कुमार को चोट पहुंचाने की बात करता दिखाई दिया। उसने यह भी दावा किया कि घटना के बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा और उसने राजनीतिक संपर्क होने जैसी बातें कहीं। वीडियो वायरल होने के बाद CJP और दूसरे राजनीतिक-सामाजिक समूहों ने उसकी गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी। हालांकि, भारद्वाज ने बाद में अपने पक्ष में कहा कि उसने हमला नहीं किया था, बल्कि आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। उसका दावा है कि उसे कई लोगों ने घेर लिया था और उसे अपनी जान का खतरा महसूस हुआ। उसने यह भी कहा कि उसके पास घटना का वीडियो सबूत मौजूद है।
राजनीतिक संरक्षण का दावा क्या है?
यह इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने राजनीतिक संपर्कों के जरिए कार्रवाई से बचने का दावा किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस और भाजपा पर सवाल उठाए।
लेकिन दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले में FIR दर्ज की गई, आरोपियों को मौके पर हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, नोटिस दिया गया और जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में चार्जशीट अदालत के सामने पेश की जानी थी।
विवाद बढ़ने के बाद CJP की ओर से मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने बाद में संबंधित SC/ST Act की धाराओं को मामले में शामिल किया। वहीं हत्या के प्रयास की धारा लगाने की मांग भी उठी। पुलिस का कहना था कि हत्या के प्रयास की धारा लागू करने का फैसला मेडिकल और जांच संबंधी विशेषज्ञ राय के आधार पर किया जाएगा।
4 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने क्या किया?
मामला दोबारा गर्म होने के बाद CJP से जुड़े लोग दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे और स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस से बातचीत के बाद 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई। इसके कुछ ही समय बाद दिल्ली पुलिस की टीम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर पहुंची। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस टीम के पहुंचने से पहले स्वतंत्र भारद्वाज वहां से निकल गया। बाद में पुलिस ने उसकी तलाश तेज की और बुलंदशहर के धामरा नारा इलाके के पास उसे हिरासत में लिया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक वह बाइक से निकलने की कोशिश कर रहा था और बाद में पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया है और उसे जंतर-मंतर मारपीट मामले में पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है/कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
स्वतंत्र भारद्वाज के मामले में अब जांच के दौरान कई सवाल अहम होंगे।
पहला—जंतर-मंतर की घटना के वीडियो फुटेज में वास्तव में क्या हुआ था?
दूसरा—संजय कुमार को लगी चोट की मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है?
तीसरा—वायरल पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज के बयान को जांच में किस तरह इस्तेमाल किया जाता है?
चौथा—SC/ST Act की कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं?
और पांचवां—क्या मेडिकल और अन्य सबूतों के आधार पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा जोड़ने की जरूरत बनती है?
इन सवालों का जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से सामने आएगा।
स्वतंत्र भारद्वाज की कहानी फिलहाल केवल एक सोशल मीडिया विवाद की कहानी नहीं रह गई है। यह जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट, पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, वायरल पॉडकास्ट, राजनीतिक संरक्षण के आरोप, SC/ST Act और अब बुलंदशहर से हुई पुलिस कार्रवाई तक पहुंच चुकी है। सबसे अहम बात यह है कि स्वतंत्र भारद्वाज पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।