NALSAR के बाद NLSIU में भी विरोध, CJI और BCI चेयरमैन के दौरे को लेकर 702 छात्रों ने उठाए सवाल
INFLOWIRE NEWS DESK/BENGALURU/16 AUGUST 2026
बेंगलुरु: देश की प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटीज में से एक National Law School of India University (NLSIU), Bengaluru में Chief Justice of India (CJI) और Bar Council of India (BCI) के चेयरमैन के प्रस्तावित दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय के छात्रों और पूर्व छात्रों के एक वर्ग ने इस दौरे पर आपत्ति जताई है।
यह विरोध ऐसे समय सामने आया है जब हैदराबाद की NALSAR University of Law से जुड़े हालिया घटनाक्रम को लेकर कानूनी शिक्षा जगत में चर्चा जारी है। NLSIU के छात्रों और alumni ने NALSAR मामले में BCI की कार्रवाई और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई है।
इसे पढ़िए....NALSAR विवाद में नया मोड़?
702 छात्रों ने जताई आपत्ति
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक NLSIU के 702 छात्रों ने CJI और BCI चेयरमैन के दौरे को लेकर विरोध दर्ज कराया है। छात्रों का कहना है कि NALSAR में हालिया घटनाक्रम को लेकर उनकी कुछ गंभीर चिंताएं हैं और ऐसे में विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में दोनों की मौजूदगी को लेकर वे असहज हैं।
छात्रों और alumni की ओर से यह मामला केवल किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि इसे अकादमिक स्वतंत्रता, छात्रों की आवाज और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों के रूप में देखा जा रहा है।
NALSAR विवाद का NLSIU पर क्या असर?
NALSAR University of Law, Hyderabad में BCI की ओर से की गई हालिया कार्रवाई को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद NLSIU समुदाय ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
NLSIU के छात्रों और alumni की आपत्ति का मुख्य केंद्र यही है कि राष्ट्रीय स्तर की कानूनी संस्थाओं में छात्रों की अभिव्यक्ति, असहमति और अकादमिक स्वतंत्रता के मुद्दों को किस तरह देखा जाना चाहिए।
CJI और BCI चेयरमैन के दौरे पर क्यों हुआ विवाद?
रिपोर्टों के अनुसार NLSIU के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय के आगामी convocation कार्यक्रम में CJI और BCI चेयरमैन की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है।
छात्रों की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि NALSAR प्रकरण से जुड़े विवादों के बीच दोनों पदाधिकारियों की मौजूदगी को लेकर विश्वविद्यालय समुदाय की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि छात्रों की आपत्ति और उनके आरोपों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह छात्रों और alumni की ओर से व्यक्त की गई प्रतिक्रिया है।
मामला सिर्फ NLSIU तक सीमित नहीं
NALSAR और NLSIU से जुड़े घटनाक्रम ने देश की National Law Universities में अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
NLSIU और NALSAR दोनों देश की प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में शामिल हैं। ऐतिहासिक रूप से NLSIU की स्थापना ने भारत में आधुनिक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय मॉडल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में NALSAR सहित कई संस्थान इसी मॉडल से विकसित हुए।
अब आगे क्या होगा?
NLSIU में छात्रों और alumni की आपत्ति के बाद अब नजर विश्वविद्यालय प्रशासन, BCI और संबंधित संवैधानिक पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया पर रहेगी।
यह विवाद आगे बढ़ता है या संवाद और स्पष्टीकरण के जरिए शांत होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि NALSAR के बाद NLSIU में भी यह मुद्दा कानूनी शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
NLSIU में CJI और BCI चेयरमैन के दौरे को लेकर छात्रों की आपत्ति ने एक बार फिर भारत की लॉ यूनिवर्सिटीज में अकादमिक स्वतंत्रता, छात्र अधिकार और संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।
702 छात्रों के विरोध की खबर सामने आने के बाद यह मामला अब केवल एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम का विषय नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस विवाद की अगली दिशा तय कर सकती है।