MP में फर्जी IAS-IPS का खेल: कहीं ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट तो कहीं स्पेलिंग मिस्टेक से खुला राज
MP Fake IAS-IPS News: मध्य प्रदेश में खुद को IAS, IPS और बड़े सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने और कथित तौर पर ठगी करने के कई मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं। इन मामलों में किसी ने सरकारी अधिकारी जैसा रुतबा बनाने के लिए फर्जी पहचान और गाड़ियों का सहारा लिया, तो किसी ने नकली नियुक्ति पत्र के जरिए युवाओं को नौकरी का सपना दिखाया।
इन मामलों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि कथित फर्जी अफसरों का खेल अलग-अलग छोटी गलतियों और शिकायतों के बाद सामने आया। कहीं होटल का बिल जांच की वजह बना तो कहीं फर्जी जॉइनिंग लेटर में लिखी गलत स्पेलिंग ने पूरा राज खोल दिया।
‘भारत सरकार’ लिखी गाड़ी और फर्जी अफसरी का रौब
भोपाल में तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े मामले ने काफी चर्चा बटोरी है। पुलिस के मुताबिक तृप्ति खुद को IAS अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग में वरिष्ठ पद पर होने का दावा करती थी। उस पर नौकरी और अन्य सरकारी लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लेने के आरोपों में कई FIR दर्ज हो चुकी हैं।
जांच के दौरान उसके कथित नेटवर्क से सरकारी पहचान का आभास देने वाली सामग्री मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें ‘भारत सरकार’ लिखी गाड़ी, कथित फर्जी CBI कार्ड और लेटरहेड जैसी चीजें शामिल हैं।
तृप्ति से जुड़ा एक वीडियो मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर को लेकर भी चर्चा में आया था। पुलिस पूरे मामले में उसके संपर्कों और कथित नेटवर्क की जांच कर रही है।
स्पेलिंग मिस्टेक ने खोल दी फर्जी IPS की पोल
भोपाल में सामने आए दूसरे मामले में ऋषि कुमार यादव पर खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स विभाग से जुड़ा अधिकारी बताने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। शिकायतों के मुताबिक कई युवाओं से करीब 8 लाख रुपये लिए गए।
मामले में सबसे अहम सुराग कथित फर्जी नियुक्ति पत्र बना। दस्तावेज में अंग्रेजी शब्दों की स्पेलिंग संबंधी गलतियां थीं, जिससे पीड़ित को शक हुआ। इसके बाद पुलिस तक मामला पहुंचा और जांच में आरोपी की कथित फर्जी पहचान सामने आई। ऋषि कुमार यादव को भोपाल की एमपी नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
घर के बाहर लगा दी ‘IAS राज सोनी’ की नेमप्लेट
इंदौर में भी फर्जी IAS बनकर रहने का मामला सामने आया। पुलिस ने हिमांशु पांचाल नाम के 28 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी और जिला कलेक्टर बताता था।
पुलिस के मुताबिक उसके किराए के मकान के बाहर ‘IAS Raj Soni – District Collector’ नाम की नेमप्लेट लगी थी। पूछताछ के दौरान वह अपने IAS होने का वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
मामला तब सामने आया जब उसने इंदौर के एक होटल में पार्टी की और बिल भुगतान को लेकर विवाद हुआ। पुलिस को सूचना मिलने के बाद जांच की गई और उसके घर से कथित फर्जी पहचान से जुड़ी सामग्री बरामद होने की बात सामने आई।
सिर्फ तीन मामले नहीं, कई जगह सामने आया ऐसा पैटर्न
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को प्रभावित करने या कथित ठगी करने के करीब पांच मामले चर्चा में आए हैं। इनमें भोपाल और इंदौर के मामलों के अलावा दूसरे जिलों से भी ऐसे आरोप सामने आए हैं।
नरसिंहपुर में एक व्यक्ति पर मैट्रिमोनियल साइट के जरिए खुद को IAS और डॉक्टर बताकर महिला से ठगी करने का आरोप सामने आया। उज्जैन में भी खुद को केंद्र सरकार का अधिकारी बताकर VIP सुविधा लेने की कोशिश का मामला रिपोर्ट हुआ है। हालांकि इन सभी मामलों में गिरफ्तारी और आरोपों की स्थिति एक जैसी नहीं है।
कैसे बचें ऐसे फर्जी अफसरों से?
इन घटनाओं से एक बात साफ है कि केवल किसी व्यक्ति की गाड़ी, कपड़े, सरकारी पद का दावा, सोशल मीडिया प्रोफाइल या किसी कथित सरकारी पहचान पत्र देखकर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
अगर कोई व्यक्ति IAS, IPS या किसी बड़े सरकारी अधिकारी के नाम पर नौकरी, ठेका, ट्रांसफर, सरकारी काम या किसी अन्य सुविधा के बदले पैसे मांगता है, तो उसकी पहचान संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जरूर सत्यापित करनी चाहिए।
खासकर सरकारी नौकरी के नाम पर एडवांस पैसे मांगना, निजी खाते में रकम भेजने का दबाव बनाना या WhatsApp पर नियुक्ति पत्र भेजना गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
भोपाल और इंदौर के मामलों में पुलिस की जांच जारी है। आरोपियों से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और कथित लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल इन मामलों में सामने आए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कितने लोगों को प्रभावित करने या ठगने के लिए किया गया था।