बड़ी खबर: महिला के घर ग्रामीणों ने ASI को पकड़ा, पुलिस अधिकारी ने चलाई गोलियां, एक की मौत, तीन घायल
बिहार के मधुबनी जिले में खाकी वर्दी को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। महिला के घर पहुंचे एक ASI को ग्रामीणों ने कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद ग्रामीणों से घिरे पुलिस अधिकारी ने अपनी सर्विस पिस्टल से फायरिंग कर दी। गोली लगने से चार ग्रामीण घायल हुए, जिनमें एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई।
मधुबनी के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव की इस घटना की पुष्टि अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में हुई है। एसएसपी योगेंद्र कुमार ने भी घटना और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो विशेष टीमों के गठन की जानकारी दी है।
>> बिहार में कानून की रखवाली करने वाली खाकी वर्दी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मधुबनी में एक ASI पर आरोप है कि वह रात के अंधेरे में एक महिला के घर पहुंचा था। ग्रामीणों ने उसे कथित तौर पर महिला के साथ पकड़ लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहला दिया। आरोप है कि ग्रामीणों से घिरने के बाद ASI ने अपनी सर्विस पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। चार ग्रामीणों को गोली लगी, एक की मौत हो गई और तीन लोग घायल हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गोली चलाने वाला पुलिस अधिकारी अब फरार है। पूरा मामला मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव का है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस पिकेट पर तैनात ASI चंद्रमोहन सिंह का गांव की एक महिला के घर आना-जाना था। एसएसपी योगेंद्र कुमार के मुताबिक, महिला के साथ ASI के कथित अवैध संबंध की बात सामने आई है।
सोमवार देर रात यानी 2 नवंबर को ASI के महिला के घर पहुंचने की खबर ग्रामीणों को लगी। ग्रामीणों ने घर को घेर लिया और कथित तौर पर ASI को अंदर ही बंद कर दिया।
इसी दौरान खुद को घिरा देखकर ASI ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाल ली और कई राउंड फायरिंग कर दी।
>> इस गोलीबारी में अशोक यादव, धनिक लाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव को गोली लगी।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 50 वर्षीय अशोक यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बाकी तीन घायलों का इलाज जारी है।
घटना के बाद मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार खुद मामले की निगरानी में जुट गए । आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और गिरफ्तारी के लिए दो विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। फिलहाल आरोपी पुलिस पदाधिकारी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
अब सवाल यह है कि कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिस पुलिस अधिकारी पर थी, उसी पर ग्रामीणों की हत्या का आरोप क्यों लगा?
क्या इस मामले में आरोपी ASI की गिरफ्तारी के बाद विभागीय लापरवाही और उसके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच होगी?
मधुबनी की इस घटना ने पुलिस व्यवस्था और कानून के रखवालों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।