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नेपाल जैसी तबाही के बीच भारत की नई तकनीक चर्चा में, लॉन्च हुआ स्वदेशी GeoSARAL

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Published on Sep 03, 2026 • 156 views
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नेपाल जैसी तबाही से निपटने में मददगार हो सकती है स्वदेशी GeoSARAL तकनीक, भारत में लॉन्च हुआ नया GIS सॉफ्टवेयर

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026: भारत में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक अहम पहल हुई है। Esri India ने GeoSARAL नाम से स्वदेशी Linux-based Desktop GIS Software लॉन्च किया है। यह सॉफ्टवेयर मैपिंग, डेटा विजुअलाइजेशन, एडिटिंग और जियोस्पेशियल डेटा की क्वेरी जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है।

हालांकि, GeoSARAL को सीधे किसी आपदा को रोकने वाला या नेपाल जैसी तबाही को निश्चित रूप से रोक देने वाला सॉफ्टवेयर कहना सही नहीं होगा। इसकी अहमियत इस बात में है कि GIS तकनीक का इस्तेमाल आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे, शहरी विकास, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है।

क्या है GeoSARAL?

GeoSARAL एक हल्का और किफायती Desktop GIS Software है, जिसे ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है जिन्हें रोजमर्रा के जियोस्पेशियल कामों के लिए बहुत जटिल GIS सिस्टम की जरूरत नहीं होती। इसमें मैप तैयार करने, जियोस्पेशियल डेटा देखने और मैनेज करने, डेटा एडिट करने तथा अलग-अलग लोकेशन से जुड़ी जानकारी को क्वेरी करने जैसे काम किए जा सकते हैं। सॉफ्टवेयर Linux और Windows पर उपलब्ध है, जबकि Android सपोर्ट भी भविष्य में आने की जानकारी दी गई है।

आपदा प्रबंधन में क्यों महत्वपूर्ण है GIS?

बाढ़, भूस्खलन, शहरी जलभराव या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसी इलाके की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध डेटा को समझना बेहद महत्वपूर्ण होता है। GIS तकनीक के जरिए अलग-अलग तरह के भौगोलिक डेटा को एक साथ देखा और विश्लेषण किया जा सकता है। इससे प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को प्रभावित इलाकों की पहचान, मैपिंग और संसाधनों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से जियोस्पेशियल तकनीक का इस्तेमाल दुनिया भर में Disaster Management समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

बिना इंटरनेट के भी काम करने की क्षमता

GeoSARAL की एक खास विशेषता यह बताई गई है कि इसमें स्थानीय रूप से स्टोर किए गए GIS डेटा और बेसमैप को इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी देखा, मैनेज और एनालाइज किया जा सकता है। आपदा की स्थिति में जब इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है, तब स्थानीय डेटा पर काम करने की क्षमता उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि इसका वास्तविक आपदा-प्रबंधन प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित सरकारी या राहत एजेंसियां इसे किस तरह अपने सिस्टम और डेटा के साथ इस्तेमाल करती हैं।

ArcGIS सिस्टम के साथ भी कर सकता है काम

GeoSARAL को मौजूदा ArcGIS इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। यह Indo ArcGIS Living Atlas से उपलब्ध कंटेंट का भी लाभ उठा सकता है। वहीं जिन संस्थानों को 3D एनालिसिस, नेटवर्क एनालिसिस और जटिल कार्टोग्राफी जैसे एडवांस फीचर्स की जरूरत होती है, उनके लिए ArcGIS Pro अलग विकल्प बना रहता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह पहल?

भारत में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थानों के लिए जमीन, सड़क, शहर, कृषि, प्राकृतिक संसाधन और आपदा प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ा सटीक भौगोलिक डेटा महत्वपूर्ण होता जा रहा है। GeoSARAL का विकास इसी बढ़ती जरूरत के बीच स्थानीय स्तर पर GIS क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है। Esri India के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य भारत की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करना और जियोस्पेशियल क्षेत्र में घरेलू तकनीकी क्षमता को मजबूत करना है।

नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि समय रहते भौगोलिक जानकारी और प्रभावित क्षेत्रों की सही मैपिंग कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में GeoSARAL जैसी GIS तकनीक आपदा की रोकथाम का अकेला समाधान नहीं, लेकिन आपदा प्रबंधन और जियोस्पेशियल डेटा के इस्तेमाल को बेहतर बनाने वाला एक उपयोगी तकनीकी साधन जरूर बन सकती है।

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Tags: GeoSARAL GIS Software Esri India Geospatial Technology Disaster Management India Technology Indigenous Technology Linux Software Mapping Technology

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