दिवाली से पहले सोना-चांदी क्यों हो रहे सस्ते? जानिए कीमतों में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क | INFLOWIRE
दिवाली और धनतेरस से पहले सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से अहम खबर है। त्योहारों के करीब आने के बावजूद कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है। खासकर चांदी में आई गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है।
24 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के अनुसार, सप्ताह के दौरान MCX पर दिसंबर वायदा सोने की कीमत करीब 3.28 प्रतिशत और चांदी की कीमत करीब 7.83 प्रतिशत नीचे रही। यानी बाजार में इस बार त्योहारों से पहले तेजी के बजाय दबाव देखने को मिल रहा है।
लेकिन सवाल है कि जिस समय भारत में सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है, उसी समय इनके दाम क्यों गिर रहे हैं?
पहली वजह: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव बना रहने की आशंका पैदा होती है।
ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच सकते हैं। इसका असर सोने और चांदी जैसे उन निवेश विकल्पों पर पड़ता है जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता।
दूसरी वजह: अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसलों पर नजर रख रहे हैं। बाजार में आशंका है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रही, तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है।
जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक बने रहते हैं, तो कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की तरफ रुख करते हैं। इससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
तीसरी वजह: डॉलर की मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत आम तौर पर अमेरिकी डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा पड़ सकता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है।
डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने भी हालिया गिरावट के दौरान कीमती धातुओं के बाजार पर असर डाला है।
चौथी वजह: निवेशकों की बिकवाली
कीमती धातुओं में गिरावट का एक कारण निवेशकों की मुनाफावसूली और बाजार में जोखिम घटाने की कोशिश भी है। जब शेयर बाजार या दूसरे निवेश विकल्पों में तेज उतार-चढ़ाव होता है, तो कुछ निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोने और चांदी में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
चांदी पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग को लेकर चिंता बढ़ने पर इसकी कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव संभव है।
पांचवीं वजह: त्योहारों की मांग हमेशा कीमतें नहीं बढ़ाती
भारत में धनतेरस और दिवाली के दौरान सोना-चांदी खरीदना परंपरा का हिस्सा है। लेकिन घरेलू त्योहारों की मांग अकेले कीमतों को तय नहीं करती। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरें, आयात लागत और निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसलिए त्योहारों के नजदीक होने के बावजूद कीमतों में गिरावट संभव है। कम कीमतों से कुछ खरीदारों को राहत मिल सकती है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि बाजार की गिरावट यहीं रुक जाए।
क्या दिवाली तक सोना-चांदी और सस्ते होंगे?
इस का निश्चित जवाब अभी देना संभव नहीं है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ती है, तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं, डॉलर कमजोर होने, बॉन्ड यील्ड घटने या खरीदारी बढ़ने पर कीमतों को सहारा भी मिल सकता है।
इसलिए केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालना कि दाम और गिरेंगे, जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह मौजूदा गिरावट को निश्चित मुनाफे का मौका मानना भी सही नहीं होगा।
खरीदार क्या ध्यान रखें?
यदि आप दिवाली या शादी के लिए आभूषण खरीद रहे हैं, तो अलग-अलग दुकानों के भाव, सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और मेकिंग चार्ज की तुलना करें। ज्वेलर से अंतिम बिल में सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज और GST का विवरण जरूर लें।
याद रखें कि MCX के वायदा भाव और बाजार में मिलने वाले तैयार आभूषणों की कीमत एक जैसी नहीं होती। शहर,शुद्धता,कर और मेकिंग चार्ज के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।
दिवाली से पहले सोने-चांदी की गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की गतिविधियों का बड़ा योगदान है। खरीदारों के लिए कम भाव राहत की बात हो सकती है, लेकिन आगे की कीमतों की दिशा अनिश्चित बनी हुई है।
INFLOWIRE — बाजार की खबर, आसान भाषा में।