झारखंड में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: देवघर पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा, फर्जी कस्टमर केयर बनकर करते थे ठगी
Deoghar Cyber Crime: झारखंड के देवघर में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को कैशबैक और अन्य सुविधाओं का झांसा देते थे और फिर उनके साथ ऑनलाइन ठगी करते थे। आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन और 9 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
छह आरोपी गिरफ्तार
देवघर पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 23 वर्षीय मनीष कुमार, 28 वर्षीय अजय दास, 20 वर्षीय प्रेम कुमार दास, 23 वर्षीय अमित दास, 23 वर्षीय सिकंदर दास और 21 वर्षीय शिवाशिष कुमार के रूप में हुई है। सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देवघर समेत झारखंड के कई इलाकों में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। झारखंड पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट गंभीर और जटिल साइबर अपराधों की जांच के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को तकनीकी सहायता भी देती है।
फर्जी कस्टमर केयर बनकर बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार आरोपियों का ठगी करने का तरीका कस्टमर केयर के नाम पर लोगों से संपर्क करना था। कथित तौर पर वे Google Pay, PhonePe और Paytm के फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को कैशबैक या किसी सेवा से जुड़ी समस्या का समाधान कराने का झांसा देते थे। इसके बाद पीड़ितों को विश्वास में लेकर उनसे ऐसी प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी, जिसके जरिए आरोपी ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस को आशंका है कि बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की जांच से गिरोह के नेटवर्क और इसके जरिए की गई ठगी के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
आठ मोबाइल और नौ सिम बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 मोबाइल फोन और 9 सिम कार्ड बरामद हुआ है । अब पुलिस इन उपकरणों की तकनीकी जांच कर रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन मोबाइल नंबरों से किन-किन लोगों को फोन किया गया था और कथित तौर पर कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया।
क्या "साइबर ठगों का गुरु" है मुख्य आरोपी?
इस मामले से जुड़ी रिपोर्टों में मनीष कुमार को साइबर ठगी के नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया गया है और इसी वजह से उसे "साइबर ठगी का गुरु" कहा जा रहा है।
यह जांच का विषय है कि गिरोह का संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था या नहीं।
इसी तरह आरोपी की कथित संपत्ति, लग्जरी लाइफ और दूसरे शहरों में संपत्ति होने से जुड़े दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
देवघर क्यों बन रहा साइबर अपराध की जांच का बड़ा केंद्र?
देवघर और आसपास के इलाकों में साइबर ठगी के मामलों में पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही है। इससे पहले भी देवघर से साइबर अपराध के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अगस्त 2026 में राउरकेला पुलिस ने भी देवघर के चार आरोपियों को एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में पुलिस ने करीब 3.5 करोड़ रुपये की कथित ठगी और लगभग 47 लाख रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी दी थी।
लोगों के लिए जरूरी सावधानी
साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी बैंक, UPI ऐप या डिजिटल पेमेंट कंपनी के नाम पर आए अनजान फोन पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, UPI PIN या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति कस्टमर केयर अधिकारी बनकर फोन करता है और मोबाइल में कोई ऐप या फाइल डाउनलोड करने के लिए कहता है, तो पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि करना जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई से कथित साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। बरामद मोबाइल और सिम की जांच के बाद यह पता चल सकता है कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा था और इनके संपर्क किन लोगों से थे। फिलहाल छह आरोपियों की गिरफ्तारी और मोबाइल-सिम की बरामदगी की जानकारी सामने आई है। मास्टरमाइंड, कुल ठगी और कथित संपत्तियों से जुड़े दावों पर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।