बेगूसराय में 5 साल के सुफियान की मौत पर सवाल: पुलिस को पहले से सूचना थी, फिर छह दिन बाद मिला शव
Inflowire Crime Report / Bihar / 25 Sep 2026
बेगूसराय/तेघड़ा: विश्वकर्मा पूजा के दिन घर से बाहर निकला पांच साल का सुफियान फिर वापस नहीं लौटा। छह दिन तक परिवार बच्चे को तलाशता रहा। माइकिंग कराई गई, रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई और पुलिस को भी बच्चे के लापता होने की सूचना दी गई। इसके बाद 22 सितंबर को धनकौल पंचायत के पास बलान नदी के बांध किनारे बच्चे का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शव की पहचान परिवार ने कपड़ों के आधार पर की।
इस घटना ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, पुलिस की शुरुआती जांच और इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्वकर्मा पूजा के दिन घर से निकला था सुफियान
परिजनों के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा पूजा के दिन सुफियान खाना खाने के बाद घर से बाहर निकला था। इसके बाद वह घर नहीं लौटा।
काफी देर तक बच्चे के वापस नहीं आने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के इलाकों के अलावा रिश्तेदारों के यहां भी खोजबीन की गई। बच्चे को तलाशने के लिए माइकिंग भी कराई गई।
बाद में परिवार की ओर से तेघड़ा थाने में उसके लापता होने की सूचना दी गई। पुलिस के अनुसार बच्चे की तलाश की जा रही थी।
छह दिन बाद नदी किनारे मिला शव
22 सितंबर को धनकौल पंचायत के पास बलान नदी के बांध किनारे बच्चे का क्षत-विक्षत शव मिला।
मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी भी पहुंचे। जांच के लिए FSL और डॉग स्क्वायड की मदद ली गई। पुलिस ने घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाकर मामले की जांच शुरू की।
शव की हालत देखकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया था। पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम समाप्त कराया गया।
सबसे बड़ा सवाल: छह दिन की तलाश में सुफियान कहां था?
बच्चे के लापता होने की सूचना पुलिस को मिलने के बाद उसकी तलाश किस स्तर पर हुई? किन जगहों पर खोज अभियान चलाया गया? क्या आसपास के CCTV, मोबाइल लोकेशन, संदिग्ध लोगों और संभावित रास्तों की जांच की गई? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल पुलिस ने हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। अधिकारियों ने सभी संभावित पहलुओं से जांच की बात कही है।
शराब के अवैध कारोबार को लेकर भी उठ रहे सवाल
इस घटना के बीच इलाके में अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी चर्चा हो रही है। बेगूसराय में सितंबर के दौरान शराब तस्करी और अवैध शराब से जुड़े कई मामलों में पुलिस और उत्पाद विभाग की कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
9 सितंबर को बखरी क्षेत्र में शराब और हथियारों के साथ युवकों का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने एक आरोपी की पहचान कर प्राथमिकी दर्ज की थी। वहीं 22 सितंबर को उत्पाद विभाग ने सकरबासा पंचायत के सरपंच और उसके सहयोगी को कथित शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया।
लेकिन इन मामलों और सुफियान की मौत के बीच कोई सीधा संबंध पुलिस ने अब तक स्थापित नहीं किया है।
इसलिए यह कहना कि सुफियान की मौत शराब माफिया के कारण हुई ये कहना अभी ठीक नहीं होगा !
प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल?
इस घटना के बाद प्रशासन के सामने कुछ बुनियादी सवाल जरूर हैं— जैसे
नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शुरुआती घंटों में किस स्तर की कार्रवाई की?
क्या बच्चे की तलाश के लिए आसपास के सभी संभावित इलाकों को व्यवस्थित तरीके से सर्च किया गया?
अगर इलाके में अवैध शराब और अपराध से जुड़ी गतिविधियों की शिकायतें थीं, तो उनकी निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी रही?
क्या पुलिस की जांच में यह पहलू भी शामिल है कि बच्चे को आखिरी बार कहां और किन लोगों के आसपास देखा गया था?
क्या समय पर कार्रवाई से सुफियान बच सकता था?
यह सवाल परिवार और स्थानीय लोगों की पीड़ा से निकल रहा है, लेकिन इसका जवाब अभी निश्चित रूप से देना संभव नहीं है।
यह जांच का विषय है कि सुफियान के साथ वास्तव में क्या हुआ, उसकी मौत कब और कैसे हुई तथा वह उन छह दिनों के दौरान कहां था। जब तक पोस्टमार्टम, FSL रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आते हैं तब तक यह कहना कि समय पर किसी विशेष कार्रवाई से उसकी जान निश्चित रूप से बचाई जा सकती थी फिलहाल ये कहना ठीक नही होगा।
लेकिन एक पांच साल के बच्चे के लापता होने के मामले में शुरुआती पुलिस प्रतिक्रिया, सर्च ऑपरेशन और जांच की गति पर सवाल उठना प्रशासन के लिए गंभीर समीक्षा का विषय जरूर है।
सरकार और प्रशासन से अब क्या अपेक्षा?
सुफियान की मौत की जांच सिर्फ आरोपी तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बच्चा घर से निकलने के बाद कहां गया, उसके साथ क्या हुआ और छह दिनों तक उसका पता क्यों नहीं चल पाया।
सरकार और जिला प्रशासन के सामने तत्काल जिम्मेदारियां हैं—
अगर जांच में किसी स्तर पर पुलिस या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना भी प्रशासन की ही जिम्मेदारी होगी।
Inflowire की बात
सुफियान की मौत का सच अभी जांच के जरिए सामने आना बाकी है। इसलिए किसी व्यक्ति, गिरोह या शराब माफिया को इस हत्या से जोड़ना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक पुलिस या जांच एजेंसी इसका प्रमाण नहीं देती।
लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है—जब एक पांच साल का बच्चा लापता होता है, तो उसकी तलाश में पहले कुछ घंटे और शुरुआती दिन कितने निर्णायक होते हैं?
सुफियान को न्याय तभी मिलेगा जब हत्या के पीछे का सच सामने आए और यदि जांच में कोई चूक या लापरवाही साबित होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय हो।
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